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प्रतिगामी शक्तियों के खिलाफ उठ खड़े होने की जरूरत: उल्हास पवार

प्रतिगामी शक्तियों के खिलाफ उठ खड़े होने की जरूरत: उल्हास पवार

संविधान का अपमान करने वालों के विरोध में भारतीय संविधान संरक्षण समिति की ओर से धरना प्रदर्शन

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

देवभूमि के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तराखंड में केवल दलित होने के कारण अत्यंत विद्वान, कर्तृत्ववान और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान किया जाना किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाना चाहिए। सामाजिक समानता की रक्षा और प्रतिगामी शक्तियों का विरोध करने के लिए लोगों को दृढ़ता से उठ खड़े होने की जरूरत है, यह विचार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं विचारक उल्हास पवार ने व्यक्त किए।

भारतीय संविधान संरक्षण समिति की ओर से भारतीय संविधान और मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान करने वाली जातिवादी प्रवृत्तियों के विरोध में पुणे शहर एवं जिले के सर्वदलीय संविधानवादी नागरिकों की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया गया।

इस आंदोलन में उल्हास पवार के साथ पूर्व विधायक जयदेव गायकवाड़, कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के पुणे (पूर्व विभाग) शहर अध्यक्ष एवं आंदोलन के मुख्य समन्वयक कुणाल राजगुरु, पूर्व नगरसेविका लता राजगुरु, विठ्ठल गायकवाड़, शैलेंद्र मोरे, संग्राम रोहम, वसंत सालवे, रोहिदास गायकवाड़, रविंद्र मालवदकर सहित विभिन्न दलों के नेता और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

मल्लिकार्जुन खड़गे को बचपन से ही सामाजिक असमानता का दंश झेलना पड़ा। उनके परिवार के पांच लोगों को जलाकर मार दिया गया था। इसके बावजूद खड़गे ने हिम्मत नहीं हारी और अपने जीवन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंजीकरण, संविधान, उद्देश्यों और पृष्ठभूमि पर सवाल उठाने का साहस उन्होंने दिखाया। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने समाज के लिए उपयोगी और क्रांतिकारी साबित होने वाले कई निर्णय लिए।

वे विद्वान हैं, बहुभाषी हैं और संवैधानिक पद पर आसीन हैं। इसके बावजूद केवल दलित होने के कारण उनका अपमान किया जाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, ऐसी चेतावनी उल्हास पवार ने इस अवसर पर दी।

वर्तमान समय में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सामने कांग्रेस ही एकमात्र मजबूत विकल्प हो सकती है। कांग्रेस ने अपनी स्थापना के समय से ही सामाजिक समानता का समर्थन किया है। कांग्रेस के प्रत्येक वार्षिक अधिवेशन के बाद सामाजिक सम्मेलन आयोजित किए जाते थे। इन सम्मेलनों में सामाजिक असमानता को समाप्त कर समानता स्थापित करने के लिए विचार-विमर्श किया जाता था। स्वतंत्रता के बाद अस्पृश्यता उन्मूलन को प्राथमिकता दी गई। कांग्रेस प्रगतिशील विचारों वाली पार्टी है, यह विचार पूर्व विधायक जयदेव गायकवाड़ ने व्यक्त किया।

उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि देश की जनता लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपना व्यापक समर्थन दे।

विजय शंखनाद रैली के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुछ जातिवादी शक्तियों द्वारा गोमूत्र छिड़ककर रामलीला मैदान को पवित्र करने का दावा किया गया। इस कृत्य के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से यह धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया।

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