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केतन अग्रवाल के जन्मदिन पर न्याय के लिए एल्गार; समयबद्ध जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और VIP ट्रीटमेंट की जांच की मांग

केतन अग्रवाल के जन्मदिन पर न्याय के लिए एल्गार; समयबद्ध जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और VIP ट्रीटमेंट की जांच की मांग

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे: आज 26 अगस्त को स्वर्गीय केतन अग्रवाल का जन्मदिन है। यह दिन परिवार के साथ खुशी से मनाया जाना चाहिए था, लेकिन केतन की हत्या के बाद आज उनके परिवार और मित्र न्याय की मांग को लेकर पत्रकार भवन में एकत्र हुए।

 

पत्रकार परिषद में केतन अग्रवाल की हत्या को अत्यंत क्रूर और पूर्व नियोजित साजिश बताया गया। इस दौरान पुलिस से मामले की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी करने, फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने तथा आरोपी को कथित तौर पर दी जा रही VIP ट्रीटमेंट की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई।

 

इस दौरान रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी के राहुल डंबाळे, अपर्णा दुबे, एडवोकेट जावेद जमादार, रुद्राणी जावळकर, कैलास देवकर, उषा आवळे, राहुल नागटिळक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

 

मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल को गिरफ्तार किया जा चुका है। पत्रकार परिषद में आरोप लगाया गया कि आरोपी को जेल में कथित तौर पर VIP ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की गई।

 

पत्रकार परिषद में यह भी कहा गया कि यदि किसी आरोपी को प्रभाव या अन्य माध्यमों से जेल में विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, तो यह गंभीर मामला है। ऐसे आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई।

 

पत्रकार परिषद में प्रमुख मांगें

समयबद्ध जांच और चार्जशीट:पुलिस प्रशासन बिना किसी दबाव के मामले की जांच कानूनी समयसीमा में पूरी करे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करे।

 

फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई:केतन अग्रवाल की हत्या के मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर जल्द फैसला सुनाने की मांग की गई।

 

VIP ट्रीटमेंट के आरोपों की जांच:आरोपी सिया गोयल को जेल में कथित तौर पर मिलने वाली विशेष सुविधाओं की उच्चस्तरीय जांच की जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले जेल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

 

पत्रकार परिषद में कहा गया कि यह लड़ाई केवल केतन अग्रवाल को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून का डर कायम करने की भी लड़ाई है। मांग की गई कि यदि आरोप अदालत में सिद्ध होते हैं तो दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा दी जाए। जब तक न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रखने की बात भी कही गई।

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