नसों और मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाए बिना हुआ टोटल हिप रिप्लेसमेंट, 42 वर्षीय मरीज दूसरे दिन चलने लगा
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे,: पुणे में 42 वर्षीय एक व्यक्ति का टोटल हिप रिप्लेसमेंट किया गया। खास बात यह रही कि सर्जरी में डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच (DAA) तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें आसपास की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाए बिना हिप जॉइंट तक पहुंच बनाई जाती है। सर्जरी के अगले ही दिन मरीज ऑपरेशन वाले पैर पर पूरा वजन देकर चलने लगा।
यह सर्जरी पुणे के सह्याद्रि सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल में की गई। मरीज को दोपहिया वाहन से गिरने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में बाएं कॉलरबोन (क्लैविकल) में फ्रैक्चर के साथ फिमोरल हेड यानी जांघ की हड्डी के ऊपरी गोलाकार हिस्से में विस्थापित फ्रैक्चर पाया गया।
फिमोरल हेड के फ्रैक्चर के उपचार के लिए एक विकल्प टूटी हुई हड्डी को अपनी जगह पर लाकर स्क्रू की मदद से जोड़ना था। हालांकि, इस प्रक्रिया में करीब छह से आठ सप्ताह तक पैर पर वजन नहीं डालने की जरूरत पड़ सकती थी। इसके अलावा हड्डी के सही तरीके से न जुड़ने और रक्त आपूर्ति प्रभावित होने के कारण हड्डी की कोशिकाओं के खराब होने यानी एवस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) का खतरा भी रहता है।
मरीज की उम्र, सक्रिय जीवनशैली और रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए मेडिकल टीम ने डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच के जरिए टोटल हिप रिप्लेसमेंट करने का निर्णय लिया। इस तकनीक में सर्जन मांसपेशियों के बीच की प्राकृतिक जगह से सामने की ओर से हिप जॉइंट तक पहुंचते हैं। इससे आसपास की मांसपेशियों और ऊतकों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है तथा मरीज को जल्द चलने-फिरने में मदद मिल सकती है।
सह्याद्रि हॉस्पिटल के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अभिजित आगाशे ने बताया कि कम उम्र के मरीज में विस्थापित फिमोरल हेड फ्रैक्चर के इलाज के दौरान तत्काल फ्रैक्चर उपचार के साथ-साथ लंबे समय में मरीज की कार्यक्षमता बहाल करना भी महत्वपूर्ण होता है। उनके अनुसार, डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच के जरिए महत्वपूर्ण मांसपेशियों को सुरक्षित रखते हुए प्राकृतिक ऊतक स्तरों से हिप तक पहुंच बनाई जा सकती है।
डॉक्टर ने बताया कि इस मामले में मरीज सर्जरी के अगले दिन ही पैर पर पूरा वजन डालने में सक्षम था और उसने जल्द ही पुनर्वास शुरू कर दिया। इससे उसकी सामान्य गतिविधियों और दैनिक दिनचर्या में जल्दी लौटने में मदद मिली।
भारत में किए गए शोधों में भी डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच के बाद सकारात्मक कार्यात्मक परिणाम सामने आए हैं। 2026 के एक भारतीय अध्ययन में 22 से 50 वर्ष की आयु के 76 मरीजों को शामिल किया गया था। अध्ययन के अनुसार, 40.8 प्रतिशत मरीजों को 24 घंटे के भीतर डिस्चार्ज किया जा सका और गंभीर जटिलताओं या दोबारा भर्ती की जरूरत नहीं पड़ी। एक वर्ष में हिप-फंक्शन के औसत स्कोर में 44.6 से बढ़कर 97.1 तक सुधार दर्ज किया गया।
भारत में 157 मरीजों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में भी DAA तकनीक के बाद कार्यात्मक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। साथ ही, अध्ययन में इस तकनीक को अपनाने के दौरान सर्जन के अनुभव और सही मरीज का चयन किए जाने के महत्व पर भी जोर दिया गया।
सर्जरी के बाद मरीज अगले ही दिन चलने लगा। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी स्थिति में लगातार सुधार हुआ और इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं, कॉलरबोन के फ्रैक्चर का इलाज बिना सर्जरी के क्लैविक्युलर ब्रेस की मदद से किया गया।



