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सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रीवा में विंध्य का पहला सीआरटी-पी प्रत्यारोपण

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रीवा में विंध्य का पहला सीआरटी-पी प्रत्यारोपण

सर्जरी सफलतापूर्वक कर रचा नया कीर्तिमान

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान रीवा मध्य प्रदेश 

  रीवा. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवा के कार्डियोलॉजी विभाग में विंध्य का पहला सीआरटी-पी (कार्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी – पेसमेकर) डिवाइस सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। इस संबंध में अधीक्षक सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि विगत दिनों मैहर जिले की अमरपाटन निवासी 72 वर्षीय महिला मरीज सांस फूलने, कमजोरी, जल्दी थकान और बार-बार अस्पताल में भर्ती होने जैसी शिकायतों के साथ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में आई थीं। मरीज की ईसीजी और ईको जांच करने पर पता चला कि उनके हृदय की पंपिंग क्षमता कम हो गई थी तथा हृदय के विभिन्न हिस्सों के बीच विद्युत गतिविधि में समन्वय की समस्या थी। इस स्थिति में हृदय के दोनों निचले कक्ष (वेन्ट्रिकल्स) एक साथ सही समय पर संकुचित नहीं हो पा रहे थे, जिससे हृदय की पंपिंग कार्यक्षमता प्रभावित हो रही थी।

कार्डियोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम द्वारा मरीज की विस्तृत जांच और मूल्यांकन के बाद विंध्य का पहला सीआरटी-पी डिवाइस सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। इस जटिल एवं चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया का सफल नेतृत्व वरिष्ठ इंटरवेंशनरल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एस. के. त्रिपाठी ने किया। इस प्रक्रिया के तहत कॉलर बोन के नीचे छाती में पेसमेकर के लिए स्थान निर्धारित कर वेनिस के माध्यम से प्रवेश लिया गया। इसमें दायां एट्रियम और दायां वेंट्रिकल में क्रमशः पहली और दूसरी लीड स्थापित की गई तथा तीसरी लीड कोरोनरी साइनस में प्रत्यारोपित की गई, जो लेफ्ट वेंट्रिकल को गति प्रदान करती है। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक है और वे चिकित्सीय निगरानी में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रही हैं। इस प्रकार के उन्नत एवं जटिल कार्डियक उपचार के लिए पहले रीवा एवं आसपास के मरीजों को बड़े महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था, लेकिन अब रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ही यह आधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

इस सफलता पर डॉ. एस. के. त्रिपाठी ने कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम की सामूहिक मेहनत, समर्पण और मरीज-केंद्रित सेवा भावना का परिणाम है। उन्होंने इसका श्रेय उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल के निरंतर मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए की गई दूरदर्शी सोच को दिया। उनके सहयोग से रीवा जैसे अंचल में अत्याधुनिक हृदय चिकित्सा सुविधाएं विकसित हुई हैं। इससे गंभीर मरीजों को महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो रही है। इस उपलब्धि के साथ सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल ने प्रदेश में उच्च स्तरीय कार्डियक सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। चिकित्सा महाविद्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं अधिष्ठाता डॉ. एस. पी. गर्ग तथा सुपर स्पेशलिटी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने इस सफलता के लिए कार्डियोलॉजी विभाग, कैथ लैब, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी विशेषज्ञों और समस्त सहयोगी कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं। इस सफल प्रोसीजर में नर्सिंग स्टाफ से सत्येंद्र व स्वाति तथा कैथ लैब टीम से जय नारायण मिश्र, मनीष, सोनाली, सुधांशु और अमन का विशेष योगदान रहा।

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