
मेडिकल वेस्ट एवं कूड़ा निस्तारण में लापरवाही पर जिलाधिकारी सख्त, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा :-जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिला गंगा समिति, वृक्षारोपण समिति, पर्यावरण समिति तथा पर्यावरण प्रदूषण एवं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से संबंधित कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी महोदय ने कूड़ा एवं मेडिकल वेस्ट के समुचित निस्तारण में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी महोदय ने मेडिकल वेस्ट के इधर-उधर फेंके जाने को अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि मेडिकल वेस्ट के लिए निर्धारित वाहनों की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर वाहन के रूट एवं समय निर्धारित किए जाएं तथा सभी चिकित्सा संस्थानों को इसकी जानकारी दी जाए। लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महेवा, जसवंतनगर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं जिला अस्पताल को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी महोदय ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर गंदगी एवं अपशिष्ट की स्थिति पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सफाई कार्यशाला के पीछे तालाब के किनारे पड़े भारी मात्रा में कूड़े के तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए।
भावलपुर, जसवंतनगर-आगरा हाईवे के किनारे कूड़े के ढेर पर जिलाधिकारी महोदय ने अधिशासी अधिकारी जसवंतनगर को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कूड़ा एमआरएफ सेंटर तक नहीं पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाईवे के किनारे कूड़ा डालना न केवल शहर की छवि खराब करता है, बल्कि माननीय न्यायालय के निर्देशों की भी अवहेलना है। संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा कूड़े की तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने सीसाहट ईदगाह के निकट, तमेरी सीसाहट रोड, लक्ष्मण कॉलोनी एमआरएफ सेंटर, लखना एमआरएफ सेंटर, लखना ग्राम मानपुरा के निकट तालाब, बकेवर एमआरएफ सेंटर तथा बकेवर-भरथना मार्ग पर कूड़े की स्थिति की समीक्षा की। बंद एमआरएफ सेंटरों को तत्काल चालू कराने, खराब सड़कों की मरम्मत कराने तथा तालाब एवं सड़क किनारे पड़े कूड़े का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारी स्वयं स्थलीय निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि कूड़ा इधर-उधर न फेंका जाए।
नवीन मंडी परिसर में गंदगी पर भी जिलाधिकारी महोदय ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मंडी परिसर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारी को पत्र लिखने तथा लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी महोदय ने सिरसा नदी के पुनरुद्धार के संबंध में नदी एवं उसके आसपास जमा कूड़े तथा जलकुंभी की सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदियों एवं जलस्रोतों को स्वच्छ रखना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने जिले के तीनों एसटीपी को 24 घंटे संचालित रखने के निर्देश दिए। एसटीपी की निगरानी के लिए कैमरे लगाए जाने तथा नियमित मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने को कहा। लखना नहर टेल पर ठोस अपशिष्ट डंप किए जाने की शिकायत पर नगर निकाय को तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई विभाग को स्थल पर सूचना बोर्ड लगाने तथा नगर पालिका को जनजागरूकता अभियान चलाने को कहा, ताकि लोग कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही डालें।
जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि जिले में सभी बल्क अपशिष्ट जनरेटरों (Bulk Waste Generators) को चिन्हित कर उनकी सूची तैयार की जाए और जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों का अनुपालन नहीं करते है उनको नोटिस जारी किए जाएं। उन्होंने विद्यालयों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छता के संबंध में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
मूर्ति निर्माण एवं विसर्जन के संबंध में जिलाधिकारी महोदय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मूर्ति निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक मिट्टी के प्रयोग के लिए जागरूक किया जाए। मूर्ति विसर्जन नदियों एवं नहरों में न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आवश्यकतानुसार गड्ढे तैयार कर मूर्तियों के पर्यावरण अनुकूल विसर्जन/भू-समाधि की व्यवस्था की जाए तथा आमजन को इसके लिए स्पष्ट विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
जिलाधिकारी महोदय ने घर-घर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक घर से नियमित रूप से कूड़ा एकत्र कर एमआरएफ सेंटर तक पहुंचाया जाए। कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित हो तथा जहां नए वार्ड बने हैं, वहां भी डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था तत्काल शुरू की जाए। उन्होंने कूड़ा संग्रहण के लिए निर्धारित यूजर चार्ज की वसूली एवं व्यवस्था को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि ठोस अपशिष्ट का निस्तारण उसी स्थान पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाए, जहां से उसका संग्रहण किया गया है। उन्होंने सभी निकायों को एमआरएफ सेंटरों को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने, नियमित निरीक्षण करने तथा स्वच्छता व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है, इसलिए लापरवाही करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
बैठक के दौरान सामाजिक निदेशक वानिकी विकास नायक, अपर जिलाधिकारी बिपिन कुमार, नगर मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बहादुर, जिला विकास अधिकारी राकेश प्रसाद, डीपीओ नमामि गंगे संजीव चौहान, जेआरएफ पर्यावरण निदेशालय डॉ संगीता सहित संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।


