
डीजे-मुक्त गणेशोत्सव का ‘सोलापुर पैटर्न’ पूरे महाराष्ट्र में सफल हो सकता है: सिद्धराम पाटील
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, प्रतिनिधि। सोलापुर में विभिन्न जाति-धर्म के नागरिक वर्षों से मिल-जुलकर रहते हैं और सालभर में करीब 187 दिन अलग-अलग त्योहार व उत्सव मनाए जाते हैं। डीजे के कारण होने वाले ध्वनि प्रदूषण और उससे पैदा होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए डीजे-मुक्त सोलापुर कृती समिति का गठन हुआ, जिसने बाद में जनआंदोलन का रूप ले लिया। इसी जनभागीदारी के चलते सोलापुर में डीजे-मुक्त गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। लोकजागृति के माध्यम से यह ‘सोलापुर पैटर्न’ पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जा सकता है, ऐसा विश्वास आंदोलन के प्रणेता और वरिष्ठ पत्रकार सिद्धराम पाटील ने व्यक्त किया।
ध्वनि प्रदूषण मुक्त गणेशोत्सव के सोलापुर पैटर्न को लेकर जागरूक पुणेकर नागरिक समिति की ओर से सौरभ वीरकर ने सिद्धराम पाटील का साक्षात्कार लिया। इस अवसर पर श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल के कोषाध्यक्ष महेश सूर्यवंशी के हाथों सिद्धराम पाटील का सम्मान किया गया। पूर्व सांसद प्रदीप रावत, नगरसेवक कुणाल तिलक, नितीन पंडित, पूर्व नगरसेवक रविंद्र माळवदकर, निलेश धायरकर और अशोक तिडके सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सिद्धराम पाटील ने कहा कि सोलापुर में एक नागरिक को हुई परेशानी से डीजे-मुक्त गणेशोत्सव आंदोलन की शुरुआत हुई। इस अभियान में विद्यार्थी, पुलिस, वकील, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों के तीन लाख से अधिक नागरिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े। यह केवल जनभावना नहीं रही, बल्कि एक मजबूत जनआंदोलन बन गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि डीजे-मुक्त गणेशोत्सव का मतलब साउंड सिस्टम पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना नहीं है। त्योहार और उत्सवों के लिए साउंड सिस्टम जरूरी हैं, लेकिन इसका अतिरेक नहीं होना चाहिए। यह बात सभी वर्गों तक पहुंचाई जाए तो समाज के विभिन्न घटक इस आंदोलन से जुड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी शहर में कुछ लोग भी सकारात्मक आंदोलन शुरू करें और उसमें निरंतरता व ईमानदारी हो तो वह आंदोलन सफल हो सकता है। पुणे जैसे बड़े शहर में गणेशोत्सव के दौरान होने वाली अव्यवस्थाओं और नागरिकों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए मजबूत जनआंदोलन की जरूरत है। आंदोलन का प्रभाव इतना व्यापक होना चाहिए कि पुलिस और प्रशासन का सहयोग भी उसे मिल सके।
सौरभ वीरकर ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान होने वाली समस्याओं और नागरिकों की परेशानी का समाधान चर्चा के माध्यम से किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए इच्छाशक्ति जरूरी है। पूरी तरह डीजे-मुक्त गणेशोत्सव का लक्ष्य लंबा और चुनौतीपूर्ण है, फिर भी इसके लिए प्रयास जारी रहेंगे। किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना सभी को साथ लेकर गणेशोत्सव को अधिक से अधिक रचनात्मक और सामाजिक रूप से उपयोगी तरीके से मनाना ही समिति की भूमिका है।
इस अवसर पर विधायक पद्धति से सार्वजनिक उत्सव आयोजित करने वाले आदर्श बाल मंडल भवानी पेठ, किंग्स बॉयज ग्रुप दहीहंडी व शिवजयंती उत्सव, कासार समाज गणेश उत्सव मंडल, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती समता प्रतिष्ठान और जय बजरंग मित्र मंडल का भी सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक सौरभ वीरकर ने किया, जबकि सूत्रसंचालन सुमित डोळे ने किया।


