सरकार एमपीएससी विद्यार्थियों के हितों का ही विचार कर रही है – विधायक शंकर जगताप
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : पुणे में एमपीएससी विद्यार्थियों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन पर राज्य सरकार संवेदनशीलता से विचार कर रही है। विद्यार्थियों की 13 में से 12 मांगें सरकार पहले ही मान चुकी है। अब केवल ऑब्जेक्टिव परीक्षा से संबंधित मांग बाकी है, जिस पर भी जल्द समाधान निकलेगा। राज्य सरकार एमपीएससी विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है, लेकिन विपक्ष को विद्यार्थियों के सवालों का राजनीतिक लाभ नहीं उठाना चाहिए। यह अपील विधायक शंकर जगताप ने की।
नवी पेठ स्थित अहिल्यादेवी शिक्षण संस्था के सामने चल रहे एमपीएससी विद्यार्थियों के आंदोलन में विधायक शंकर जगताप ने पहुंचकर विद्यार्थियों से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत की।
शंकर जगताप ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं किया जा रहा है। यहां आंदोलन कर रहे विद्यार्थी महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों और किसान परिवारों से पुणे में पढ़ाई के लिए आए हैं। सरकार ने उनकी 13 में से 12 मांगों को पहले ही स्वीकार कर लिया है। केवल एक मांग को लेकर आंदोलन जारी है और सरकार उस पर भी विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग में हुई कुछ कथित अनियमितताओं के संबंध में सरकार ने विशेष जांच समिति गठित की है और इस मामले में सरकार तेजी से कदम उठा रही है। हालांकि, विपक्ष विद्यार्थियों के सवालों को राजनीतिक मुद्दा बनाकर अपना हित साधने का प्रयास कर रहा है।
शंकर जगताप ने कहा कि वे स्वयं वर्ष 1997 से 2000 तक एमपीएससी की तैयारी करने वाले विद्यार्थी रहे हैं। इसलिए विद्यार्थी और सरकार के प्रतिनिधि, दोनों भूमिकाओं में उन्हें एमपीएससी विद्यार्थियों की समस्याओं की जानकारी है। उन्होंने कहा कि वे एक बार फिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर विद्यार्थियों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने के संबंध में चर्चा करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि एस. एम. जोशी पुल पर चल रहे एमपीएससी विद्यार्थियों के आंदोलन की प्रमुख मांग महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष का इस्तीफा है। हालांकि, कानून के अनुसार यह मांग पूरी करना संभव नहीं होगा। विद्यार्थियों और उन्हें समर्थन देने वाले राजनीतिक नेताओं को भी इसकी जानकारी है। इसके बावजूद केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए आंदोलन को मुद्दा बनाया जा रहा है, ऐसी आलोचना भी शंकर जगताप ने की।



