
शिवाजी गणेशन की तीन ऐतिहासिक तमिल फिल्मों की प्रिंट्स राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार को दान
‘थिरुवरुत्चेल्वर’ की NFAI में पहली प्रति शामिल; ‘थिल्लाना मोहनांबाल’ और ‘थिरुविलयाडल’ की अतिरिक्त प्रिंट्स से संरक्षण को मिलेगा बल
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : दिग्गज अभिनेता शिवाजी गणेशन अभिनीत और प्रसिद्ध निर्देशक ए. पी. नागराजन द्वारा निर्देशित तीन ऐतिहासिक तमिल फिल्मों की 35 मिमी प्रिंट्स को NFDC–राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार भारत (NFAI), पुणे के संग्रह में शामिल किया गया है। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) की फिल्म रिसर्च ऑफिसर अपर्णा सुब्रमणियन ने इन फिल्म प्रिंट्स को NFDC-NFAI को सौंपा।
इस संग्रह में ‘थिरुवरुत्चेल्वर’ (1967), ‘थिल्लाना मोहनांबाल’ (1968) और ‘थिरुविलयाडल’ (1965) शामिल हैं। इनमें ‘थिरुवरुत्चेल्वर’ का विशेष महत्व है, क्योंकि इससे पहले इस फिल्म की किसी भी प्रारूप में प्रति NFAI के पास उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा ‘थिल्लाना मोहनांबाल’ और ‘थिरुविलयाडल’ की एक-एक अतिरिक्त जीवित प्रिंट भी संग्रह में शामिल हुई है।
इन अतिरिक्त प्रिंट्स के उपलब्ध होने से फिल्मों के संरक्षण कार्य को मजबूती मिलेगी। एक फिल्म प्रिंट को सुरक्षित रखते हुए दूसरी प्रिंट का उपयोग संदर्भ, तकनीकी जांच, डिजिटलीकरण और तुलनात्मक अध्ययन जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। इससे दुर्लभ फिल्म सामग्री के संरक्षण में अभिलेखागार को अधिक सुविधा मिलेगी।
NFDC के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम ने कहा कि भारतीय सिनेमाई विरासत के संरक्षण में संस्थागत संग्रहों के साथ-साथ उन व्यक्तियों और संगठनों का भी महत्वपूर्ण योगदान है, जो पुरानी फिल्म सामग्री को सुरक्षित रखने के महत्व को समझते हैं। इन तीन महत्वपूर्ण तमिल फिल्मों के राष्ट्रीय संग्रह में शामिल होने से भारतीय सिनेमा की विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
अपर्णा सुब्रमणियन ने बताया कि वह पिछले साढ़े तीन वर्षों से पुरानी फिल्म प्रिंट्स को खोजने और संग्रहित करने का कार्य कर रही हैं। जनवरी 2026 में उन्होंने ‘रथकनीर’ (1954) की एक प्रिंट भी NFAI को दान की थी। अपने संग्रह की महत्वपूर्ण प्रिंट्स को उचित संरक्षण सुविधाओं वाले सार्वजनिक अभिलेखागार को सौंपना उनके प्रयासों का उद्देश्य है।
इन प्रिंट्स की खोज अगस्त 2026 में प्राप्त सूचनाओं के आधार पर शुरू हुई। ‘थिल्लाना मोहनांबाल’ की प्रिंट चेन्नई में मिली, जिसे FTII के पूर्व छात्र साई संजय की सहायता से पुणे लाया गया। इसके बाद ‘थिरुविलयाडल’ और ‘थिरुवरुत्चेल्वर’ की प्रिंट्स भी बरामद की गईं। जब यह पता चला कि NFAI के पास ‘थिरुवरुत्चेल्वर’ की कोई प्रति नहीं है, तो इस प्रिंट को अभिलेखागार तक पहुंचाने को प्राथमिकता दी गई। तीनों प्रिंट्स 13 सितंबर 2026 को चेन्नई से एकत्र कर NFAI को सौंप दी गईं।
तीनों नई प्रिंट्स में मैजेंटा रंग के फीके पड़ने और प्रोजेक्टर से बने ऊर्ध्वाधर खरोंच के निशान दिखाई देते हैं। दशकों तक उपयोग और उष्णकटिबंधीय तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में रखे जाने के कारण इन प्रिंट्स की स्थिति प्रभावित हुई है। यह स्थिति बची हुई फिल्म सामग्री को संस्थागत अभिलेखागार में सुरक्षित रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
NFAI के संग्रह में ‘थिल्लाना मोहनांबाल’ के कई संरक्षण तत्व पहले से मौजूद हैं, जबकि ‘थिरुविलयाडल’ का केवल एक संरक्षण तत्व उपलब्ध है। ऐसे में नई प्रिंट का मिलना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इससे मूल फिल्म सामग्री को अनावश्यक उपयोग से बचाते हुए अन्य प्रिंट के माध्यम से शोध और तकनीकी कार्य किए जा सकेंगे।
इन तीन फिल्मों की प्रिंट्स का अधिग्रहण NFDC-NFAI द्वारा भारतीय सिनेमाई विरासत की दुर्लभ फिल्म सामग्री को खोजने, संग्रहित करने और संरक्षित करने के जारी प्रयासों को और मजबूत करता है। भविष्य में इन प्रिंट्स का उपयोग संरक्षण, शोध, डिजिटलीकरण और अध्ययन के लिए किया जाएगा, जिससे भारतीय सिनेमा के इतिहास की ये महत्वपूर्ण कृतियां सुरक्षित रह सकेंगी।


