
लोकतंत्र में अच्छे नेतृत्व के लिए व्यावहारिक शिक्षा जरूरी – सांसद डॉ. राधा मोहनदास अग्रवाल
एमआईटी डब्ल्यूपीयू में मिटसॉग के 22वें बैच का दीक्षारंभ
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : “व्यावहारिक शिक्षा पद्धति आवश्यक है और इसी से लोकतंत्र में अच्छा नेतृत्व उभरता है। राजनीति में कदम रखने वाले छात्रों को सामाजिक सवालों के साथ-साथ जिम्मेदारियां निभाने के लिए तत्पर रहना चाहिए। मिटसॉग के छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय चुनावों में उम्मीदवारी लेकर चुनाव लड़ना चाहिए,” ऐसी सलाह राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहनदास अग्रवाल ने दी।
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट द्वारा आयोजित मास्टर्स इन पॉलिटिकल लीडरशिप एंड गवर्नमेंट (एमपीएलजी) के 22वें बैच के दीक्षारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वे बोल रहे थे।
इस अवसर पर मिटसॉग के पूर्व छात्र व विधायक सुमित वानखेड़े, विधायक हेमंत ओगले और आंध्रप्रदेश के राज्यसभा सांसद विजय चिंताकायल सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अध्यक्षता एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के संस्थापक और डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने की।

एमआईटी डब्ल्यूपीयू के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ऑनलाइन उपस्थित थे। साथ ही माईर्स एमआईटी के संस्थापक ट्रस्टी प्रो. प्रकाश जोशी, डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. रविराजा सिताराम, मिटसॉग के निदेशक डॉ. नमेश किलेमशेट्टी, संकल्प संघई और डॉ. गोपाल वामणे उपस्थित थे।
डॉ. राधा मोहनदास अग्रवाल ने कहा, “राजनीति में पैसे की जरूरत नहीं होती, बल्कि पैसे वाले राजनीति को अपनी मुट्ठी में बंद करना चाहते हैं। इसके लिए यह विचारधारा बदलना जरूरी है। जनता की समस्या को पहचानने वाला ही सच्चा नेता होता है। राजनीति में व्यावहारिक ज्ञान के बल पर करुणानिधि, जयललिता, ज्ञानी जैल सिंह जैसे कई नेताओं ने अपनी अलग पहचान बनाई है। राजनीति में हारने वाला व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होता है। इसलिए उत्कृष्ट वक्ता बनो।”
विजय चिंताकायल ने कहा, “ज्ञान के बिना प्रगति नहीं होती। डॉ. राहुल कराड ने 22 साल पहले शुरू किया हुआ मिटसॉग पूरे देश का भविष्य तय करेगा और राजनीति की दिशा बदलेगा। राष्ट्र निर्माण के लिए लोकतंत्र को समर्पित नेताओं की जरूरत है।”
डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा, “राजनीति में शिक्षित और अच्छे लोगों का आना जरूरी है। अगर राजनेता प्रशिक्षण लेंगे तो देश का प्रशासन और लोकतंत्र सुधारने में समय नहीं लगेगा। देश के अलग-अलग राज्यों में एसओजी मॉडल शुरू है। भारत सरकार और राज्य सरकारों ने यूथ पार्लियामेंट शुरू किया है। साथ ही 6 विधानसभाओं के साथ हमारे MoU हुए हैं।”
सुमित वानखेड़े ने कहा, “विचारों को सत्य में बदलने का कार्य डॉ. राहुल कराड ने किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की चुनौतियों को समझो। समाज, देश और लोगों की भावना को समझ कर अच्छे काम के लिए राजनीति करो।”

हेमंत ओगले ने कहा, “राजनीति में व्यावहारिक भूमिकाओं का अत्यंत महत्व है। अच्छे राजनीतिक लोगों की विरासत लेकर सामाजिक और राजनीतिक कार्य करो।”
डॉ. रविराजा सिताराम ने कहा, “देश को उत्तम प्रशासन की जरूरत है और लोकतंत्र को सही दिशा देने का कार्य एसओजी के माध्यम से पूरा होता दिख रहा है।”
डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने ऑनलाइन संदेश में कहा कि टी. एन. शेषन के मार्गदर्शन में डॉ. राहुल कराड ने यह स्कूल शुरू किया है।
इस अवसर पर एसओजी की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन अतिथियों के हाथों किया गया। एसओजी के छात्र अंशुल वर्मा और मोहम्मद नाजीश ने अपने विचार रखे।
एसओजी के छात्रों ने भारतीय राजनीति को दी नई दिशा

MIT स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट न केवल भारत में बल्कि एशिया में भी राजनीति में ट्रेनिंग देने वाला पहला इंस्टीट्यूशन है। इस स्कूल के ज़रिए, नेशनल लेवल पर अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों में पॉलिटिकल लीडरशिप में अहम योगदान देने वाले स्टूडेंट्स में विजय चिंतकयाल, हेमंत ओगले, सुमित वानखेड़े, प्रिया तायडे, प्रियंका मेदनकर, सिद्धेश नाइक, स्नेहिल देसाई, पंकज चंदेल, प्रसाद सनप, अभिजीत मोरे, विधि पलासपुरे, निधि कामदार, रजत जसूजा, विक्रम गुनकर, संध्या सोनवणे, रविराज खाड़े, मृणाल ढोले पाटिल शामिल हैं।


