
विधायक सुनील शेळके के विरोध में सूचना अधिकार कार्यकर्ता का जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे,। सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील गुजर ने मावल विधानसभा क्षेत्र के राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक सुनील शेळके के विरोध में पुणे जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना देकर कथित मारपीट, धमकी और अवैध खनन के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
सुनील गुजर का आरोप है कि 16 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में उनके साथ मारपीट की गई तथा सूचना अधिकार के माध्यम से प्राप्त दस्तावेज छीन लिए गए। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता करुणाताई सरोदे के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और जातिसूचक गाली-गलौज किए जाने का आरोप लगाया। गुजर ने दावा किया कि यह घटना उनके द्वारा कथित अवैध खनन और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर करने के प्रयासों के कारण हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अवैध खनन और रॉयल्टी का मामला उठाया
धरने के दौरान सुनील गुजर ने मावल तालुका के खांडी-सावळा और आंबले क्षेत्र में कथित अवैध गौण खनिज उत्खनन का मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में अनुमति नहीं मिलने के बावजूद पत्थर और मुरुम का उत्खनन किया गया। उन्होंने संबंधित खनन गतिविधियों, रॉयल्टी भुगतान और संभावित सरकारी राजस्व नुकसान की जांच कराने की मांग की।
गुजर ने टाटा कंपनी से संबंधित कथित खनन गतिविधियों तथा आंबले क्षेत्र की विभिन्न जमीनों पर उत्खनन के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में सरकारी खजाने को बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान हुआ है। हालांकि, कथित उत्खनन की मात्रा, बकाया रॉयल्टी और नुकसान की राशि का आधिकारिक सत्यापन आवश्यक है।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
सुनील गुजर ने मांग की कि जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में हुई कथित घटना की निष्पक्ष जांच की जाए और प्रत्यक्षदर्शी सरकारी कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएं। साथ ही, संबंधित भूमि अभिलेखों, खनन अनुमतियों, रॉयल्टी भुगतान और पर्यावरण संबंधी नियमों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज, वीडियो और अन्य साक्ष्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित विधायक, कंपनी और अन्य पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होना बाकी है। आरोपों की सत्यता जांच और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही निर्धारित की जा सकती है।



