
1668 से महाराष्ट्र-फ्रांस के व्यापारिक संबंधों की विरासत; डॉ. अमोल शिंदे ने IFCCI सेमिनार में रखे विचार
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : तीन शताब्दियों से अधिक पुरानी व्यापारिक परंपरा का उल्लेख करते हुए MIDC के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अमोल शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र ने वैश्विक निवेश के लिए अपने दरवाजे और अधिक खुले किए हैं।
पुणे में आयोजित पहले इंडो-फ्रेंच मैन्युफैक्चरिंग सेमिनार में बोलते हुए डॉ. शिंदे ने महाराष्ट्र और फ्रांस के बीच पुराने व्यापारिक संबंधों का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर MIDC के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी (निवेश प्रोत्साहन) डॉ. अमोल शिंदे, मुंबई में फ्रांस के महावाणिज्यदूत पैट्रिक लेवरिनो, IFCCI की पश्चिम क्षेत्रीय निदेशक श्वेता पाहुजा, IFCCI उद्योग समिति के उपाध्यक्ष अरुण सधीश, पुणे जिला परिषद की महिला एवं बाल कल्याण समिति की सभापति अंकिता पाटील तथा कंपनी सेक्रेटरी अभिजीत मोडक उपस्थित थे।
डॉ. अमोल शिंदे ने कहा, “महाराष्ट्र और फ्रांस के बीच पहला आधिकारिक व्यावसायिक संबंध 1668 में स्थापित हुआ था। उस समय छत्रपति शिवाजी महाराज ने फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी को राजापुर (कोकण) में वखार स्थापित करने की अनुमति दी थी।”
इस ऐतिहासिक संबंध को आधुनिक निवेश के साथ जोड़ते हुए डॉ. शिंदे ने महाराष्ट्र सरकार की निवेश सुगमता से जुड़ी विभिन्न पहलों की जानकारी दी। इनमें IFCCI-MIDC साझेदारी, MIDC कंट्री डेस्क, MILAAP लैंड पोर्टल, MAITRI 2.0 और Invest Maharashtra जैसी पहल शामिल हैं।
इसके बाद आयोजित CEO Roundtable में डॉ. शिंदे ने उद्यमियों के विभिन्न सवालों के सीधे जवाब दिए। सेमिनार में फ्रांस के मुंबई स्थित महावाणिज्यदूत पैट्रिक लेवरिनो के साथ 80 से अधिक प्रमुख उद्यमियों ने सहभागिता की।



