आहरण संवितरण अधिकारियों का दो दिवसीय लेखा प्रशिक्षण संपन्न
आहरण संवितरण अधिकारियों को दिया गया वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रीवा मध्य प्रदेश
रीवा. प्रशासनिक कार्यों में नियमों और प्रक्रियाओं में लगातार परिवर्तन होते हैं। नए आदेशों-निर्देशों और प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए जिला कोषालय द्वारा आहरण संवितरण अधिकारियों का प्रशिक्षण चार और पाँच नवम्बर को ई दक्षता केन्द्र में आयोजित किया गया। इस संबंध में जिला कोषालय अधिकारी पुष्पेन्द्र शुक्ला ने बताया कि प्रशिक्षण प्रतिदिन दो पालियों में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान लेखा संधारण, ऑनलाइन माध्यम से बिलों के भुगतान, सर्विस बुक संधारण, जीपीएफ तथा डीपीएफ के भुगतान एवं भण्डार क्रय नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई।
जिला कोषालय अधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि सभी कार्यालय प्रमुख हर माह अधीनस्थ कर्मचारियों के सेवा अभिलेख और सर्विस बुक का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। इनमें आवश्यक जानकारी अद्यतन दर्ज कराकर सत्यापित करें। पोर्टल पर सभी कर्मचारियों के समग्र नम्बर की जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। हर माह वित्त विभाग के पोर्टल से रिकंसलिएशन रिपोर्ट निकालकर उसका कैशबुक से मिलान कराएं। दोनों के आंकड़े एक जैसे होने चाहिए। इसके मिलान और सत्यापन का प्रमाण पत्र हर माह कोषालय को प्रस्तुत करें। आकस्मिक व्यय मद के देयकों को पारित करते समय नियम 8 का पालन करें। सक्षम अधिकारी की मंजूरी और बजट आवंटन के बाद ही इसका भुगतान करें। आउटसोर्स कर्मचारियों को सेडमैप के माध्यम से बिना टेंडर के लिया जा सकता है। सेडमैप के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारी उपलब्ध नहीं है तो फिर टेंडर निकालकर निर्धारित संस्था से इनकी सेवाएं लें। इनकी जानकारी और उपस्थिति रोम्स पोर्टल पर दर्ज होने के बाद ही भुगतान करें। आहरण संवितरण अधिकारी 50 हजार रुपए तक की खरीद बिना टेण्डर से कर सकते हैं। इसी तरह 50 हजार रुपए से 2.50 लाख रुपए तक की खरीद के लिए तीन सदस्यीय विभागीय समिति गठित करें। इसमें एक सदस्य कोषालय का होना आवश्यक है।
प्रशिक्षण में बताया गया कि नवीन व्यवस्थाओं के अनुसार डीपीएफ का भुगतान अब संचालक पेंशन के माध्यम से होगा। इसके लिए कार्यालय प्रमुख की ओर से विभाग के प्रमुख को प्रस्ताव भेजें। विभाग प्रमुख की ओर से संचालक पेंशन को भुगतान के लिए पत्र भेजा जाएगा। किसी शासकीय सेवक के लंबित भुगतान के लिए न्यायालय से आदेश होने पर विभाग प्रमुख की अनुमति के बाद ही भुगतान किया जाएगा। भुगतान के बिल के साथ विभाग प्रमुख अथवा सक्षम अधिकारी की स्वीकृति का पत्र देना आवश्यक होगा। सरेण्डर लीव के प्रकरणों में भी एक अप्रैल 2025 से नए नियम लागू कर दिए गए हैं। एक जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त अथवा मृत होने वाले शासकीय सेवकों के सरेण्डर लीव की गणना 1977 के नियम से होगी तथा इसके बाद के सभी प्रकरणों में 2025 में लागू नियम मान्य होंगे। नए नियमों के अनुसार सेवानिवृत्ति के समय यदि अर्जित अवकाश अधिकतम नहीं है तो उसमें हाफ पे लीव को जोड़कर तीन सौ दिन का भुगतान किया जाएगा।
प्रशिक्षण में बताया गया कि एनपीएस प्राप्त करने वाले कर्मचारी सेवाकाल में केवल चार बार ही एनपीएस से राशि आहरित कर सकते हैं। कर्मचारी द्वारा जमा किए गए अंशदान की कुल राशि से केवल 25 प्रतिशत राशि के आहरण की पात्रता होगी। एक बार राशि आहरण करने के बाद दूसरी बार राशि आहरण के लिए कम से कम चार वर्ष का अंतर आवश्यक होगा। ऑनलाइन माध्यम से जो ट्रांजेक्शन फेल हो जाते हैं वे चालान के रूप में पुन: मिलते हैं। आहरण संवितरण अधिकारी फेल ट्रांजेक्शन की पोर्टल के माध्यम से हर 15 दिन में निगरानी करें। फेल ट्रांजेक्शन के चालान को अधिकतम एक वर्ष की समय-सीमा में पुन: भुगतान कराया जा सकता है। फेल ट्रांजेक्शन का चालान मिलने पर तत्काल पुन: भुगतान की कार्यवाही करें। प्रशिक्षण सहायक संचालक श्रीमती नम्रता शुक्ला तथा सहायक कोषालय अधिकारी प्रशांत मिश्रा द्वारा दिया गया।

