अब तहसील स्तर पर भी स्थापित होंगे मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष
सूखा प्रभावित क्षेत्रों के जरूरतमंद मरीजों को मिलेगी समय पर चिकित्सा सुविधा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का महत्वपूर्ण निर्णय
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान मुंबई महाराष्ट्र
मुंबई, महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष का विस्तार तहसील स्तर तक करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सूखा प्रभावित तहसीलों में भी मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष स्थापित किए जाएंगे। विशेष बात यह है कि प्रत्येक कक्ष में स्वतंत्र चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने 6 नवंबर 2026 को इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। यह व्यवस्था खरीफ सीजन 2026 में ट्रिगर-1 के तहत सूखा घोषित की गई सभी तहसीलों में लागू होगी। इसके साथ ही जिला और तहसील स्तर पर स्वास्थ्य समन्वय समितियों का भी गठन किया जाएगा।
नए निर्देशों के अनुसार, तहसील स्तर पर यह कक्ष पंचायत समिति कार्यालय में संचालित होगा। जिलाधिकारी स्वतंत्र चिकित्सा अधिकारी को कक्ष प्रमुख नियुक्त करेंगे। उनके सहयोग के लिए लिपिक और टंकलेखक की व्यवस्था होगी, जबकि आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित खंड विकास अधिकारी की होगी।
पहले सरकारी योजनाओं से मिलेगा उपचार
जरूरतमंद मरीजों को उनकी पात्रता के अनुसार पहले आयुष्मान भारत, महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना, श्रमिक विभाग की योजनाओं और धर्मार्थ अस्पतालों के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इन योजनाओं के लिए पात्र नहीं होने वाले मरीजों के आवेदन संबद्ध अस्पतालों के माध्यम से ऑनलाइन मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे। इसमें सहायता निधि कक्ष मरीजों का मार्गदर्शन करेगा।
कक्ष प्रमुख उपजिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपकेंद्रों और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों की पहचान करेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आर्थिक परेशानी के कारण कोई भी मरीज उपचार से वंचित न रहे।
जिला और तहसील स्तर पर बनेंगी समितियां
तहसील स्तरीय समिति के अध्यक्ष स्थानीय विधायक होंगे, जबकि उपविभागीय अधिकारी (राजस्व) सह-अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाएंगे। तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी, तहसील स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और केमिस्ट-ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधि समिति के सदस्य होंगे। कक्ष प्रमुख सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष पालकमंत्री और सह-अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे। जिला स्वास्थ्य अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे। इसके अलावा चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े दो समाजसेवी गैर-सरकारी सदस्य के रूप में शामिल किए जाएंगे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भी ली जाएगी मदद
इस पहल के तहत महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, महाराष्ट्र मेडिकल परिषद, स्थानीय चिकित्सा संगठनों और निजी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों का सहयोग लिया जाएगा। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर मरीजों को आवश्यक जांच और दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी।
महीने में दो बैठकें अनिवार्य
जिला और तहसील स्तर की दोनों समितियों को महीने में कम से कम दो बैठकें करना अनिवार्य होगा। दुर्गम क्षेत्रों, अधिक आबादी वाले इलाकों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां प्राथमिकता से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
समितियां पेयजल और गर्मी से होने वाली बीमारियों की स्थिति की समीक्षा करेंगी। साथ ही स्वास्थ्य शिविर, मोबाइल मेडिकल टीम और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं की योजना तैयार करेंगी। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों तथा मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मंत्रालय को भेजी जाएगी नियमित रिपोर्ट
तहसील स्तरीय सहायता निधि कक्ष अपने दैनिक कार्यों और स्वास्थ्य शिविरों की रिपोर्ट जिला कक्ष को भेजेगा। जिला कक्ष सभी तहसीलों की रिपोर्ट एकत्रित कर मंत्रालय स्थित मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष को प्रस्तुत करेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर लिया गया यह निर्णय मुख्यमंत्री सहायता निधि व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मार्थ अस्पताल सहायता कक्ष के प्रमुख रामेश्वर नाईक ने बताया कि तहसील स्तर पर कक्ष स्थापित होने से जरूरतमंद मरीजों की समय पर पहचान हो सकेगी और उन्हें उचित उपचार के साथ आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी जरूरतमंद मरीज का इलाज न रुके।


