बहराइच

बहराइच में भ्रष्टाचार पर प्रशासनिक मौन का गंभीरता से संज्ञान लें मुख्यमंत्री योगी

बहराइच में भ्रष्टाचार पर प्रशासनिक मौन का गंभीरता से संज्ञान लें मुख्यमंत्री योगी

विक्रांत/ संदीप अवस्थी बहराइच

बहराइच अंतर्गत ग्राम पंचायत बहोरीकपुर से ग्राम पंचायत सिपहिया प्युली के लिए जिला पंचायत से, खड़ंजा कार्य का निर्माण कराया जा रहे खड़ंजे मैं व्याप्त अनियमित की पुष्टि सड़क मार्ग में प्रयोग की जा रही घटिया किस्म की इंट एवं मिट्टी पटाए कार्य ना के बराबर से हो रही है परंतु क्षेत्रीय प्रशासन से की गई शिकायतों पर यदि सरकारी दृष्टि डाली जाए तो साबित होता है इस भ्रष्टाचार में प्रशासन का मौन किस ओर इशारा करता प्रतीत होता है उदाहरण अर्थ इस भ्रष्टाचार की शिकायत जब उप जिलाधिकारी महसी से की गई तो उनके द्वारा संज्ञान लेने से किनारा करते हुए जिला पंचायत से शिकायत करने की सलाह , देकर किनारा कर लिया गया तो क्या अनैतिक तरीके से हो रहे विकास कार्य का निरीक्षण या औचक निरीक्षण की परंपरा को ही विराम दे दिया गया है सरकार द्वारा यदि नहीं तो योगी सरकार द्वारा मानक के अनुरूप कार्य करने के निर्देश तो दे रखे हैं लेकिन इनका अनुपालन हो रहा है या नहीं इस पर ध्यान दिया जाना बाकी क्यों है योगी सरकार के अधिकारी भ्रष्टाचार की जांच करवाने के बजाय पल्ला झाड़ते क्यों नजर आ रहे हैं क्या यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना समर्थन देना नहीं है योगी सरकार के अधिकारियों द्वारा अगर इस तरह गैर जिम्मेदाराना तरीके से भ्रष्टाचार के प्रति उदासीन रवैया , अपनाया जा रहा है जो प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के दावे को खोखला साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है तो और क्या समझ जाएगा जबकि मुख्य विकास अधिकारी महोदया बहराइच का सीयूजी नंबर पर पूरे दिन में किए गए तीन बार फोन से स्पष्ट रूप से सीयूजी नंबरों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है जिसे सरकार ने उदारता के साथ जनता से संबंध शिकायतों के निवारण हेतु प्रयुक्त किया गया था परंतु जनपद बहराइच में, इस सरकारी सहायता सीयूजी नंबर की उपयोगिता व्यर्थ साबित हो रही है सरकार की मनसा के विरुद्ध भी अधिकारियों का सीयूजी नंबर बना झुनझुना और भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रशासनिक मौन और उदासीनता प्रदेश के ईमानदार एवं कर्मठ युवा मुख्यमंत्री की छवि धूमिल , करने वाली कार्यशैली पर मुख्यमंत्री को तत्काल गंभीरता से संज्ञान, लिया जाना समसामयिक परिप्रेक्ष्य में समीचीन एवं कबीले तारिक माना जाएगा, अन्यथा की स्थिति भ्रष्टाचार के प्रति सरकार का मौन समर्थन ही माना जाएगा जनता के पटल पर.

 

 

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