
जमीनी स्तर पर लोगों की आकांक्षाएं विधायिका में प्रतिबिंबित होः महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
राष्ट्रीय विधायक सम्मेलन, भारत की ओर से दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन
देशभर के विभिन्न राजनीतिक दलों के २०० से अधिक विधायकों ने भाग लिया
पुणे, : विधायिका में कानून बनाते समय उसमें जमीनी स्तर की आकांक्षाएं प्रतिबिंबित होनी चाहिए तथा जनता के साथ बातचीत और विधायिका के कामकाज के बीच संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए. राष्ट्रीय जनसंपर्क और विधायी कार्य जन प्रतिनिधियों के लिए मूल्य संवर्धन करते हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शनिवार को देश भर के सभी दलों के विधायकों को बहुमूल्य मार्गदर्शन देते हुए कहा.
एमआयटी डब्ल्यूपीयू में राष्ट्रीय विधायक सम्मेलन, भारत की ओर से विधायकों के लिए आयोजित ‘नेतृत्व क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ में मुख्यमंत्री फडणवीस बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.
इस समय मंच पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, राज्य विधान परिषद के सभापति राम शिंदे, उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सी.पी. जोशी, सम्मेलन के संस्थापक संयोजक डॉ. राहुल कराड, कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस और मीटसॉग के प्रा. परिमल माया सुधाकर उपस्थित थे. सम्मेलन में देश भर से विभिन्न राजनीतिक दलों के २०० से अधिक विधायकों ने भाग लिया.
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा, जनप्रतिनिधि अपने अंतर्निहित नेतृत्व गुणों के माध्यम से लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चुनाव लडते है. हालांकि, चुनाव के बाद वे बहक जाते है. इसलिए हमें लोगों के कल्याण के लिए काम करते रहना चाहिए. जनता के बीच रहते हुए, विधानमंडल पर विचार करना चाहिए और विधानमंडल में रहते हुए, निर्वाचन क्षेत्र पर विचार करना चाहिए. इससे जनप्रतिनिधियों का महत्व बढ़ेगा.जन प्रतिनिधियों को अपने संवैधानिक कर्तव्यों के अनुरूप कार्य करें. नई प्रौद्योगिकियों को निरंतर आत्मसात करे. लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करते समय आलोचना को भी सहे.
सुमित्रा महाजन ने कहा, सतत विकास के लिए जनप्रतिनिधि मिलकर काम करें. भारतीय भावना को ध्यान में रखते हुए सामूहिक रूप से विकास के बारे में सोचना चाहिए. चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के प्रयास करें. यह सम्मेलन जन प्रतिनिधि बनने का मंत्र प्रदान करेगा. विधानमंडल को ऐसी बैठकें अपने कोष से आयोजित करनी चाहिए. अगर राजनीति में अच्छे लोग होंगे और सक्षम विपक्षी दल होगा तो जनप्रतिनिधियों का काम बेहतर होगा. जनता का अच्छा प्रतिनिधि कैसे बनें और जनता की सेवा कैसे करे, यह सीखने के लिए ऐसी बैठके आवश्यक है.
सतीश महाना ने कहा, लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों को काम करें. उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र से आगे बढ़कर शहर, राज्य और देश के बारे में सोचें. हमें अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक हो, अगर हम सभी जनप्रतिनितिधयों का सम्मान करेंगे और जनता के कल्याण के लिए काम करेंगे तो लोकतंत्र में जनता की भागीदारी बढ़ेगी.
डॉ. राहुल कराड ने कहा, देश में पहली बार सभी विधानसभाओं और विधान परिषदों के विधायक दल की विचारधारा से ऊपर उठकर इस सम्मेलन के मंच आए है. सनातन परंपरा वहीं कडी है जो सभी को जोडती है. यह बैठक विधायकों के बीच संवाद बनाने, अच्छी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं का आदान प्रदान करने और इसके माध्यम से विकास की राजनीति विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है. लोकतंत्र में गुणात्मक परिवर्तन लाने के लिए कई नई पहलों को क्रियान्वित कर रहे है. भारतीय छात्र संसद ने युवाओं को अपने विचार व्यक्त करने के लिए एक मंत्र प्रदान किया है, जबकि राष्ट्रीय विधान सभा लोकतंत्र की सेवा है.
राम शिंदे ने मतदाताओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के विषय पर मार्गदर्शन दिया.
यहां पर मुख्यमंत्री फडणवीस नेे लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, राज्य विधान परिषद के सभापति राम शिंदे, यूपी के विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सी.पी. जोशी को सम्मानित किया गया.
प्रा,गौतम बापट ने सूत्रसंचालन किया.
राजनीति सामाजिक आर्थिक सुधार लाती : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी
ऑनलाइन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, देश में बदलाव के लिए जनप्रतिनिधियों के रवैये में बदलाव होना जरूरी है. इस दृष्टि से यह सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण है. लोकतंत्र केवल सत्ता के बारे में नहीं है, यह राजनीति, सामाजिक कार्य और विकास के बारे में है. राजनीति सामाजिक आर्थिक सुधार लाती है. इसलिए जनप्रतिनिधियों को लोगों के प्रसन्नता सूचकांक को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. निर्वाचन क्षेत्र में संरचनात्मक, सामाजिक रूप से लाभकारी और सतत विकास कार्यक्रम लागू किए जाने चाहिए. लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए. संवैधानिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को पूरा किया जाना चाहिए. संवैधानिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को पूरा करें, इस गुणात्मक परिवर्तन से ही लोकतंत्र सशक्त होगा और राष्ट्र प्रगति करेगा.