
सुरक्षा व्यवस्था की कमी आतंकवादी हमले का कारण बनी – डॉ. हुलगेश चलवादी
सीमा क्षेत्रों में स्थित आतंकी ठिकानों को नष्ट करना आवश्यक
पुलवामा से पहलगाम तक – हमले का सख्त जवाब देने की मांग”
पुणे: देश के मुकुट माने जाने वाले कश्मीर घाटी के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा मासूम पर्यटकों पर किए गए नरसंहार से पूरा देश स्तब्ध है। इस हमले में मारे गए परिवारों के दुख में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सहभागी है। परंतु, सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक के कारण यह आतंकवादी हमला हुआ।
ऐसे अत्यंत दुर्गम पर्यटन स्थल पर बड़ी संख्या में पर्यटकों के एक स्थान पर एकत्र होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी? ऐसा सवाल बसपा के प्रदेश महासचिव और पश्चिम महाराष्ट्र के प्रमुख प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने शुक्रवार (दि. 25) को उठाया।
उन्होंने कहा कि हमले के बाद एक विशेष वर्ग को सोशल मीडिया के माध्यम से निशाना बनाया गया और दो धर्मों के बीच दूरी पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को इन प्रयासों को तुरंत रोकना चाहिए। यह समय एकजुट होने का है, ऐसा भी डॉ.चलवादी ने कहा।
‘पुलवामा’ की तरह ही ‘पहलगाम’ की इस घटना के बाद देशवासियों में भारी असंतोष की लहर दौड़ पड़ी है। सीमा क्षेत्र में मौजूद आतंकी अड्डों को स्थायी रूप से समाप्त करने का यही सही समय है, ऐसा स्पष्ट मत डॉ. चलवाड़ी ने व्यक्त किया।
सीमावर्ती क्षेत्रों से हो रही घुसपैठ और आतंकवादी हमलों को हमेशा के लिए रोकने के लिए पीओके के संदर्भ में सरकार को उचित निर्णय लेना चाहिए, ऐसा आह्वान भी डॉ.चलवादी ने किया।
पर्यटन काल में कश्मीर घाटी के दुर्गम क्षेत्रों में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए, ऐसा बसपा का मत है। देश की सुरक्षा से संबंधित इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद राजनैतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय केंद्र सरकार को आवश्यक सभी कदम उठाकर जनता का विश्वास पुनः प्राप्त करना चाहिए, ऐसा डॉ.चलवादी ने कहा।
ऐसी घटनाएं देश में कहीं भी दोबारा न हो, इसके लिए प्रत्येक भारतीय को सतर्क रहने की आवश्यकता है, ऐसा भी उन्होंने कहा।
पहलगाम हमला सीधे तौर पर आतंकवादियों द्वारा छेड़ा गया पाकिस्तान प्रायोजित युद्ध है। इस हमले के बाद केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय, पाकिस्तान के साथ भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेंगे।
पाकिस्तान में भारत सरकार की भूमिका के खिलाफ प्रतिक्रिया हो रही है। लेकिन देशवासियों की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के प्रश्न पर सरकार को किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए, ऐसा स्पष्ट और दृढ़ आह्वान डॉ. चलवादी ने किया।


