
देशी गोवंश के संरक्षण, संवर्धन व प्रचार हेतु व्यापक जनजागरूकता आवश्यक – सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील
देशी गोवंश जतन व संवर्धन सप्ताह का सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील के हाथों शुभारंभ
पुणे,– राज्य के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील ने कहा कि देशी गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए समाज के सभी स्तरों पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है। वे पुणे स्थित डॉ. शिरनामे सभागृह, कृषी महाविद्यालय में महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी द्वारा आयोजित “देशी गोवंश जतन व संवर्धन सप्ताह” कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
इस अवसर पर मंच पर राज्य के कृषि मंत्री माणिकरावजी कोकाटे, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष शेखर मुंदडा, महाराष्ट्र राज्य कृषि शिक्षा के उपाध्यक्ष तुषार पवार, महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी के अध्यक्ष शरद गडाख, कृषि आयुक्त सुरज मांढरे, कृषि शिक्षा महासंचालक श्रीमती वर्षा लड्डा, सहयोगी अधिष्ठाता महानंद माने, प्रमुख वैज्ञानिक सोमनाथ माने सहित कृषि क्षेत्र के कई गणमान्य उपस्थित थे।
अपने संबोधन में श्री पाटील ने कहा कि देशी गोवंश केवल दुग्ध उत्पादन का स्रोत नहीं है, बल्कि जैविक खेती में उपयोगी गोबर, गोमूत्र तथा अन्य कृषि उपयोगी तत्वों की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। देशी गोवंश का संरक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
उन्होंने कहा कि इस सप्ताह का उद्देश्य देशी गोवंश को लेकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और जागरूकता को प्रोत्साहित करना है। आज के तकनीकी युग में देशी गोवंश का वैज्ञानिक रूप से प्रबंधन करने की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। यह सप्ताह युवाओं, किसानों, शोधकर्ताओं व विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर विचार-मंथन की एक अहम प्रक्रिया को जन्म देगा, जिससे कृषि क्षेत्र में नई दिशा व नीतियों का मार्ग प्रशस्त होगा।
श्री पाटील ने ऐसे कार्यक्रमों को ग्रामीण समृद्धि, पर्यावरण संतुलन और टिकाऊ कृषि विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।



