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सिम्बायोसिस के अंतरराष्ट्रीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का आह्वान

सिम्बायोसिस के अंतरराष्ट्रीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का आह्वान

भारतीय संस्कृति और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश दुनिया तक पहुंचाएं: जिष्णू देव वर्मा

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र 

पुणे,। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में युवाओं को केवल व्यावसायिक सफलता पर ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, करुणा और जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करने पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड) यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त कर रहे अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों से अपने-अपने देशों में भारत की संस्कृति और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।

 

वे लवळे स्थित सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड) यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय छात्र दीक्षांत समारोह-2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सिम्बायोसिस के संस्थापक अध्यक्ष एवं कुलाधिपति प्रो. डॉ. एस. बी. मुजुमदार, प्रो-कुलाधिपति डॉ. विद्या येरवडेकर, कुलपति डॉ. रामकृष्णन रामन, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, मुंबई में फ्रांस के महावाणिज्यदूत पैट्रिक लेवेरिनो तथा सिम्बायोसिस इंटरनेशनल स्टूडेंट्स काउंसिल के अध्यक्ष हेनरी तेबांडेके सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

 

राज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन ला रही है। ऐसे समय में युवाओं को यह अधिक महत्वपूर्ण समझना चाहिए कि वे अपने कार्य किस प्रकार करते हैं। प्रत्येक कार्य में नैतिकता, करुणा और ईमानदारी का समावेश होना आवश्यक है।

 

उन्होंने कहा कि नेतृत्व केवल राजनीतिक या प्रशासनिक पद तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण से समाज का नेतृत्व कर सकता है। भारतीय संस्कृति में ‘धर्म’ का अर्थ मानव को श्रेष्ठ मूल्यों की ओर प्रेरित करना है।

 

राज्यपाल ने सिम्बायोसिस के संस्थापक डॉ. एस. बी. मुजुमदार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत पर आधारित एक ऐसी संस्था स्थापित की है, जिसने दुनिया भर के विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर शिक्षा के साथ संस्कार भी प्रदान किए हैं।

 

उन्होंने कहा कि सिम्बायोसिस से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की सामाजिक जिम्मेदारी अधिक है। वे अपने देशों में लौटते समय भारत की संस्कृति, मानवीय मूल्यों, मित्रता और पुणे की समृद्ध परंपराओं की यादें साथ लेकर जाएं।

 

समारोह में फ्रांस के महावाणिज्यदूत पैट्रिक लेवेरिनो ने भारत-फ्रांस के बीच शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने, विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान करने तथा मानवता की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

 

सिम्बायोसिस के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. एस. बी. मुजुमदार ने कहा कि भारत में शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, विविधता, लोकतंत्र और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ जैसे जीवन मूल्यों का भी अनुभव मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान का उपयोग समाज और देश के विकास के लिए करने का आह्वान किया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो-कुलाधिपति डॉ. विद्या येरवडेकर ने विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों तथा सिम्बायोसिस संस्थान की प्रगति पर प्रकाश डाला।

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