
स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की चुनावी तैयारी में जुटें – एड. सुनील डोंगरे
राज्य में बसपा बनेगी ‘बैलेंस ऑफ पॉवर’ – डॉ. हुलगेश चलवादी का स्पष्ट दावा
पुणे: छत्रपती शिवाजी महाराज, क्रांतिसूर्य महात्मा जोतिराव फुले, राजर्षी छत्रपती शाहू महाराज और महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने वाले प्रगतिशील महाराष्ट्र के समग्र विकास के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ही एक सशक्त और वैचारिक रूप से स्पष्ट विकल्प है। “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” इस मूलमंत्र पर आधारित बसपा की विचारधारा न केवल समाजकारण बल्कि राजकारण में भी एक नई प्रेरणा देने वाली शक्ति है।
हाल ही में पुणे में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष एड. सुनील डोंगरे ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से स्पष्ट रूप से कहा कि आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों को लक्ष्य में रखते हुए अब बूथ स्तर तक सांगठनिक ताकद बढ़ाई जाए और पार्टी का “नीला झंडा” व “हाथी” चुनाव चिन्ह घर-घर तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब बसपा की नीतियां, सोच और संगठन समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए।
बैठक में राज्य प्रभारी रामचंद्र जाधव, प्रदेश महासचिव व पश्चिम महाराष्ट्र झोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी, अॅड. संजीव सदाफुले, वरिष्ठ नेता अप्पासाहेब लोकरे, दादाराव उईके, पुणे जिलाध्यक्ष अशोक गायकवाड, जिल्हा प्रभारी, जिल्हा कमिटी सदस्य, विधानसभा अध्यक्ष एवं अन्य सभी प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक को संबोधित करते हुए एड. सुनील डोंगरे ने कहा कि बसपा संत परंपरा और समाज सुधारकों के विचारों पर चलकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की वैचारिक धारा को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब हमारी सीधी लड़ाई राज्य की सत्ताधारी और पारंपरिक पार्टियों से है। इसलिए आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव चौरंगी और निर्णायक होंगे, जिसमें बसपा की भूमिका सबसे अहम होगी।
प्रदेश महासचिव और पश्चिम महाराष्ट्र झोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने अपने भाषण में कहा कि देश में बहुजन विचारधारा को जीवित रखने के लिए बसपा का कैडर पूर्णतः कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बसपा के पास एक ठोस और समर्पित ‘वोट बैंक’ है, और कैडर की मेहनत व मतदाताओं के विश्वास की बदौलत बसपा अब ‘बैलेंस ऑफ पॉवर’ के रूप में उभरेगी।
डॉ. चलवादी ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में जो सरकारें खुद को बहुजन समर्थक कहती हैं, वे केवल फुले, शाहू और आंबेडकर के नाम का उपयोग करती हैं, लेकिन उनके विचारों को नीतियों और कार्यक्रमों में लागू नहीं करतीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल उनके नामों से सरकार नहीं चलती, बल्कि बहुजन समाज के हक और विकास के लिए ठोस काम होना चाहिए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी जिलों में माहभर के भीतर संगठनात्मक बैठकें लेकर बूथ स्तर पर रचना मजबूत की जाएगी। साथ ही विशेष संपर्क अभियान चलाकर हर घर तक पार्टी की नीति, विचार और घोषणा पत्र पहुंचाया जाएगा।
पार्टी नेतृत्व ने यह विश्वास जताया कि इस बार स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों में बसपा निर्णायक भूमिका में होगी और जनता अब बदलाव चाहती है – नारा नहीं, नीति देखेगी।


