
दोषी पुलिसकर्मियों पर दर्ज हो अत्याचार अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा: बसपा महासचिव डॉ. हुलगेश चलवादी की मांग
पुणे:महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता का केंद्र माने जाने वाले पुणे शहर में महिलाओं की सुरक्षा एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिन्ह के रूप में सामने आई है। यदि स्वयं पुलिसकर्मी ही महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करें, तो पीड़ितों को न्याय की गुहार के लिए किसके पास जाना चाहिए? — यह सवाल बहुजन समाज पार्टी ने उठाया है।
हाल ही में चर्चित कोथरुड पुलिस स्टेशन प्रकरण ने संपूर्ण पुलिस व्यवस्था की छवि को धूमिल किया है। पीड़ित युवतियों के साथ मारपीट कर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों पर अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए — यह मांग बसपा के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी तथा पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने सोमवार (4 अगस्त) को की।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो बहुजन समाज पार्टी सड़कों पर उतरकर तीव्र आंदोलन करेगी।
डॉ. चलवादी ने कहा कि पुलिस हिरासत में हुई सोमनाथ सूर्यवंशी की मृत्यु के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है, जिससे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में कोथरुड थाने में युवतियों द्वारा लगाए गए आरोपों को भी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि बिना किसी वारंट के पुलिसकर्मियों द्वारा युवतियों के घर में जबरन घुसकर, शयनकक्ष और स्नानगृह की तलाशी लेना, और अशोभनीय भाषा का प्रयोग करना — यह सब “पुरोगामी महाराष्ट्र” के नाम पर कलंक है। उन्होंने पुणे पुलिस आयुक्त से मांग की कि वे दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध अविलंब मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
पीड़ितों ने सहायक पुलिस निरीक्षक प्रेमा पाटिल, संभाजीनगर पुलिस स्टेशन के अमोल कामटे, तथा छत्रपति संभाजीनगर की महिला कॉन्स्टेबल संजीवनी शिंदे पर मारपीट, जातिसूचक अपशब्द एवं यौन अपमान के आरोप लगाए हैं। बसपा ने इन आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर SC/ST अत्याचार अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है, अन्यथा उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
डॉ. चलवादी ने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर की एक 23 वर्षीय विवाहिता महिला, जो अपने पति द्वारा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर पुणे आई थी, उसकी सहायता करने वाली तीन युवतियों को स्थानीय पुलिस ने बिना किसी सूचना के हिरासत में लेकर उनके साथ अभद्रता की। उन्होंने राज्य महिला आयोग से भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की।



