
सत्ताधारियों के खिलाफ एकजुट होकर सतत संघर्ष की जरूरत
‘लोकशाही संवाद’ कार्यक्रम में विचारकों की राय; महाराष्ट्र युवक कांग्रेस ने पांच वैचारिक अभियानों की शुरुआत
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे: सत्ताधारियों की कथित हुकूमशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ एकजुट होकर तीव्र और लगातार संघर्ष करने तथा जनता के बीच अपनी भूमिका निरंतर रखने की आवश्यकता है, ऐसा मत विचारकों ने व्यक्त किया। लोकतंत्र की पुनर्स्थापना, संविधान की गरिमा और जमीनी स्तर पर जनता से नए सिरे से जुड़ने का संकल्प युवक कांग्रेस को लेना चाहिए, ऐसा आह्वान भी किया गया।
महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘लोकशाही संवाद’ कार्यक्रम के तहत अंधश्रद्धा उन्मूलन के लिए काम करने वाले डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, वरिष्ठ विचारक गोविंद पानसरे, साहित्यकार एम. एम. कलबुर्गी, पत्रकार गौरी लंकेश तथा रोहित वेमुला के नाम से पांच वैचारिक अभियानों का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर भारतीय युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा, वरिष्ठ विचारक विश्वंभर चौधरी, विधिज्ञ असीम सरोदे, सामाजिक कार्यकर्ता स्मिता पानसरे और हमीद दाभोलकर ने अपने विचार रखे। ‘लोकतांत्रिक संकल्प वृक्ष’ को प्रतीकात्मक रूप से पंचनदियों के जल से सींचकर अभियानों की शुरुआत की गई।
घोले रोड स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता उल्हास पवार, पूर्व विधायक मोहन जोशी, अभय छाजेड, प्रदेश प्रवक्ता गोपाळ तिवारी, पूर्व महापौर प्रशांत जगताप सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
मनीष शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को लेकर यह धारणा बन रही है कि वह समय के साथ आगे नहीं बढ़ रही है। इस भ्रम को दूर करने के लिए पार्टी को अधिक एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सत्ता एक विशेष आर्थिक मॉडल के जरिए काम कर रही है, जबकि कांग्रेस गांधीजी की समावेशी विचारधारा पर आधारित है। श्रमिक, मजदूर, महिला, वंचित और शोषित वर्गों के लिए काम करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संगठन को फिर से जनाधार मजबूत करना होगा।
विश्वंभर चौधरी ने कहा कि कांग्रेस केवल राजनीतिक दल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम रही है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों का मूल अधिकार है और उसका संरक्षण सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी सत्य से दूरी बना रहे हैं और समाज में विकृतियां बढ़ रही हैं, जिसके खिलाफ जागरूकता, संगठन और नए नेतृत्व की जरूरत है।
असीम सरोदे ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने प्रशासन और न्याय व्यवस्था का राजनीतिकरण किया है, जिससे मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपराधी ठहराया जा रहा है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे युवाओं में अलगाव की भावना बढ़ रही है।
हमीद दाभोलकर ने कहा कि ये अभियान दीर्घकालीन और सतत रूप से चलने चाहिए। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं की प्रतिबद्धता का संकेत है। उन्होंने कहा कि संविधान आधारित मूल्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए युवा पीढ़ी को विचार और नीति दोनों स्तरों पर सक्रिय होना होगा।
स्मिता पानसरे ने कहा कि समाज में बदलाव के लिए दर्शक बने रहने के बजाय स्पष्ट भूमिका लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विचारधारात्मक आधार के बिना संघर्ष प्रभावी नहीं हो सकता और समान मुद्दों पर एकजुटता बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना में महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष शिवराज मोरे ने कहा कि यह अभियान राज्य के कोने-कोने तक जाकर सामाजिक जागरूकता फैलाएंगे। वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्य, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शिक्षा



