
केके केयर हॉस्पिटल का ऑर्थोरिन्यू के साथ सहयोग
पुणे : पुणे स्थित केके केअर हॉस्पिटल ने आर्थोरिन्यू के साथ सहयोग किया है. आर्थोरिन्यू भारत में अमेरिका स्थित रिजेनेक्स यूएसए के आधिकारिक प्रतिनिधि हैं. रिजेनेक्स युएसए की स्थापना 20 वर्ष पहले हुई थी और इसने दुनिया भर में 520,000 से अधिक मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है. यह कई प्रकार की सर्जरी के लिए एक विश्वसनीय विकल्प भी बन गया है. मुंबई स्थित आर्थोरिन्यू का केके केअर हॉस्पिटल के साथ सहयोग से लोग अपने शरीर की कोशिकाओं के उपयोग से जहां संभव हो वहा सर्जरी के बिना विभिन्न सामान्य आर्थोपेडिक समस्याओं पर उपचार ले सकेंगे. यह जानकारी पत्रकार परिषद में भूलतज्ञ व पेन मॅनेजमेंट विशेषज्ञ और केके केअर हॉस्पिटल की संचालिका डॉ.वर्षा कुऱ्हाडे, पेन मॅनेजमेंट विशेषज्ञ डॉ.माधुरी लोकापूर,लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ.श्रीकांत कुऱ्हाडे और आर्थोपेडिक सर्जन डॉ.तुषार चौधरी इन्होने दी. इस दौरान फिजिशियन डॉ.महावीर सतीश चंद बगरेचा व आर्थोरिन्यू के दिगांत देसाई उपस्थित थे.
भूलतज्ञ और पेन मॅनेजमेंट विशेषज्ञ और केके केअर हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. वर्षा कुऱ्हाडे ने कहा की, यह सहयोग मस्क्युलोस्केलेटल स्थितियों के समस्याओं पर उपचार के लिए अद्ययावत इंटरवेंशनल और विना शस्त्रक्रिया विकल्पों को प्रदान करता है. रीजेनरेटिव मेडिसिन में विभिन्न उपचार योजनाएं शामिल हैं, उनका पेटंट रिजेनेक्स यूएसए के पास है और इसमें सुपर कॉन्स्ट्रेटेड प्लेटलेटस और मेसेनकाइमल कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है.
उन्होंने आगे कहा की, विभिन्न प्रकार की खेल के दौरान होनेवाली चोटें, सॉफ्ट टिश्यूज, लिगामेंट्स, टेंडन्स, मांसपेशियों में मोच और मेनिस्कस, हड्डियों में प्रारंभिक डिजनरेटिव परिवर्तन आदि विभिन्न स्थितियों का उपचार इन प्रक्रियाओं द्वारा किया जा सकता है.इसमें मेसेनकाइमल कोशिकाओं से रक्त का नमूना लिया जाता है, जो प्लेटलेट प्लाज्मा का मुख्य स्रोत हैं और इसके बाद रक्त के नमूने को लॅब में प्रक्रिया की जाती है और लोकल ॲनेस्थेशिया के तहत शरीर में वापस इंजेक्ट किया जाता है. जिससे शरीर की स्व-उपचार प्रणाली उत्तेजित होती है. प्लेटलेट्स का केंद्रीकरण नियमित पीआरपी से 30 गुना अधिक है. इस तकनीक को युएस एफडीए द्वारा मान्यता है.
भारत में 18 से 89 वर्ष की आयु के मरीजों पर रिजनरेटिव्ह प्रक्रियाएं की गई हैं और यह प्रक्रिया विभिन्न मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं वाले मरीजों के लिए बहुत उपयोगी है.
आज के समय में निदान पद्धति में एक्स-रे, एमआरआई के अलावा सोनोग्राफी का ट्रेंड बढ़ रहा है. जब कोई मरीज ओपीडी में आता है, तब सोनोग्राफी की मदद से कहा दर्द हो रहा है, वह जगह ढूंढ सकते है, उदा. अगर किसी के कंधे में दर्द हो रहा हो तो उस इंसान को उसके कंधे हिलाने को कहे और मांसपेशियों में दर्द शुरू होने की सही जगह ढूंढे मतलब इस प्रकार से हम सटीकता से जगह ढूंढ सकते है।
यह करते हुए किसी प्रकार की उपचार के बाद शरीर की हलचल अनुकूल रखने के लिए फिजियोथेरेपी की महत्त्वपूर्ण भूमिका कायम है.
इंटरव्हेंशनल ऑर्थोपेडिक्स और पेन मॅनेजमेंट – भविष्य में सुपर स्पेशालिटी चार दशको पहले पेन मॅनेजमेंट सोसायटी यह अस्तित्व में आयी. डॉ. वर्षा के अनुसार, आज भी भारत में पेन मॅनेजमेंट के बारे में जागरूकता नहीं है. बुजुर्ग लोगों की बढ़ती लोकसंख्या, खिलाड़ियों की बढती संख्या और उन्हें लगनेवाली चोटे, असामान्य दर्द के लिए कारणीभूत दीर्घकालीन बीमारियों में बढ़त इन सभी बातो को ध्यान में लेते हुए पेन मॅनेजमेंट यह आने वाले भविष्य में भारत के एक प्रमुख सुपर स्पेशालिटी के रूप में उभर आएगा. आज हर घर में एक इंसान को कोई न कोई दर्द हो रहा होता है, लेकिन पेन फिजिशियन्स का प्रमाण बहुत कम है.
केके केअर हॉस्पिटल यह मल्टीस्पेशालिटी सुविधा देता है जिसके चऱ्होली और आळंदी में दो युनिट है.



