औरैया सूचना अधिकारी का मनमाना रवैया
पुणे,लखनऊ, बिहार, और मध्यप्रदेश में मान्यता, पर औरैया में रोक – सवाल यह कि डर किससे?
औरैया/लखनऊ: जब लखनऊ निदेशालय से लेकर बिहार, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र तक विशाल समाचार को मान्यता प्राप्त है, तब औरैया सूचना अधिकारी आखिर किस आधार पर अड़ंगा लगा रहे हैं? क्या स्थानीय अफसर खुद को “निदेशालय से भी बड़ा” समझने लगे हैं?
20 सितंबर की सीधी कोशिश
विशाल समाचार ने 20 सितंबर 2025 को सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी, औरैया के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। इस दौरान कार्यालय ने आवेदन स्वीकार करने के बजाय विभिन्न हवाले देकर बात टाल दी। प्रतिनिधि कार्यालय नहीं गए, लेकिन मोबाइल कॉल और दस्तावेज़ भेजने की कोशिश के बावजूद अधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी।
इसके बाद भी अधिकारी ने संवाद करने से इंकार किया और घंटों इंतजार कराने के बावजूद उपस्थित नहीं हुए। कार्यालय ने “ओरिजिनल प्रिंट-कॉपी” की नई शर्त थमा दी, जिसे पूरा करना प्रतिनिधि के लिए तत्काल संभव नहीं था।
पत्रकारिता पर रोक या व्यक्तिगत एजेंडा?
सूचना विभाग का दायित्व है जनता और सरकार के बीच सूचना का सेतु बनाना। लेकिन औरैया कार्यालय का रवैया ठीक उल्टा है।
मोबाइल नंबर अक्सर बंद रहते हैं।
नियमों का हवाला देकर आवेदन टाला जाता है।
पत्रकारों को मिलने तक की अनुमति नहीं दी जाती।
स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि अधिकारी का व्यवहार निष्पक्ष नहीं, बल्कि “चयनात्मक” है। चर्चा यहाँ तक है कि चुनाव के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं के प्रति झुकाव पहले भी देखा गया था।
विशाल समाचार की आपत्ति
संस्थान के वरिष्ठ संपादक का कहना है:
“लखनऊ और इटावा सहित कई राज्यों में हम मीडिया लिस्ट में शामिल हैं। मुख्यमंत्री की खबरें सीधे हमें मिलती हैं और प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं। लेकिन औरैया कार्यालय पत्रकारों की राह रोक रहा है। यह जनता के अधिकार और मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।”:जब लखनऊ निदेशालय से लेकर बिहार, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र तक विशाल समाचार को मान्यता प्राप्त है, तब औरैया सूचना अधिकारी आखिर किस आधार पर अड़ंगा लगा रहे हैं? क्या स्थानीय अफसर खुद को “निदेशालय से भी बड़ा” समझने लगे हैं?
मुख्य सवाल:
– लखनऊ, बिहार, मध्यप्रदेश और पुणे में मान्यता, तो औरैया में क्यों रोक?
– प्रतिनिधि से मिलने तक अनुमति क्यों नहीं दी?
– क्या यह पत्रकारिता पर रोक या व्यक्तिगत एजेंडा है?- क्या औरैया कार्यालय खुद को निदेशालय से भी बड़ा मान रहा है?
– क्या सरकार की पारदर्शिता और सुशासन यहीं ध्वस्त हो रही है?
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर चोट
यह मामला केवल विशाल समाचार तक सीमित नहीं है। यह पत्रकारिता और जनता के सूचना अधिकार का मुद्दा है। लोकतंत्र में चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर हमले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार सुशासन और पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन अगर ज़मीनी स्तर पर अधिकारी ही मनमानी करेंगे, तो शासन की छवि पर बड़ा दाग लगेगा। औरैया जिला सूचना अधिकारी का यह रवैया साफ संकेत है कि कुछ अफसर खुद को कानून और निदेशालय से ऊपर मान बैठे हैं।
सवाल उठते हैं:
क्या औरैया कार्यालय को निदेशालय से बड़ा समझने का हक है?
क्या अलग नियम और अलग मानक लागू किए जा रहे हैं?
क्या यह रवैया जनता और पत्रकारिता को दबाने की कोशिश नहीं है?
स्पष्ट चेतावनी: विशाल समाचार ने कहा है कि अगर यही रवैया जारी रहा, तो कार्यालय की प्रक्रिया, संपर्क और रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे।
निष्कर्ष:लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है। औरैया सूचना अधिकारी की हठधर्मिता साबित करती है कि कुछ ज़िलों में अफसर अपने को कानून से ऊपर समझ बैठे हैं। सरकार को तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए, वरना यह नज़ीर बन जाएगा—और कल किसी भी मीडिया संस्थान को मनमाने ढंग से दबाने की कोशिश हो सकती है।
संस्थान के वरिष्ठ संपादक का कहना है:
“लखनऊ और इटावा सहित कई राज्यों में हम मीडिया लिस्ट में शामिल हैं। मुख्यमंत्री की खबरें सीधे हमें मिलती हैं और प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं। लेकिन औरैया कार्यालय पत्रकारों की राह रोक रहा है। यह जनता के अधिकार और मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है
।”



