
वंदे मातरम् की रचना — प्रखर तेज और प्रेरणा का शाश्वत स्रोत
वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष के प्रेरक सफर का भावनात्मक अनुभव
हिंदू महिला सभा के नवरात्र महोत्सव के अमृत महोत्सव का समापन समारोह
पुणे: “हमारे घर में धन शब्दों का ही है, शब्द ही हमारे अस्त्र हैं…” इस अभंग की अनुभूति श्रोताओं ने उस क्षण में की, जब ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्र मंत्र की ऊर्जामयी गाथा उनके सामने जीवंत हुई। वंदे मातरम् की रचना से लेकर आज तक के 150 वर्षों के ऐतिहासिक प्रवास को दर्शाने वाला यह अनूठा कार्यक्रम पुणे के सदाशिव पेठ स्थित भावे प्राथमिक विद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया।
यह अवसर था हिंदू महिला सभा के नवरात्र महोत्सव के अमृत महोत्सवी वर्ष के समापन का।
‘वंदे मातरम् 150’ शीर्षक वाले इस अभिवाचनात्मक दृकश्राव्य कार्यक्रम ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की भूमिका को नए सिरे से याद कराया।
ब्रिटिश शासनकाल में डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने नवंबर 1875 में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ की रचना की थी, जिसे बाद में उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति आनंदमठ में सम्मिलित किया।
बंकिमचंद्र के असामयिक निधन के बावजूद, उनकी लेखनी से निकला यह गीत अगले सात दशकों तक भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन गया।
‘वंदे मातरम्’ के उच्चारण मात्र से सोए हुए राष्ट्र में चेतना जागृत हुई।क्रांतिकारियों की सशस्त्र लड़ाई से लेकर सत्याग्रहियों के अहिंसक आंदोलन तक, यही गीत प्रेरणा का स्रोत बना — और आम जनमानस के हृदय में भी देशभक्ति का ज्वार भर गया।
कार्यक्रम में लेखक और शोधकर्ता मिलिंद सबनीस, दिग्दर्शक प्रसाद कुलकर्णी, संगीतकार अजय पराड, अभिवाचक अभिषेक खेडकर, प्रदीप फाटक और अवंती लोहोकारे, तथा तकनीकी सहयोगी सुरेंद्र गोखले ने सहभागिता की। इस टीम ने स्वतंत्रता संग्राम के युद्धघोष ‘वंदे मातरम्’ को अभिवाचनात्मक और दृकश्राव्य प्रस्तुति के रूप में मंचित कर दर्शकों से खूब सराहना पाई।
सभा की अध्यक्ष सुप्रिया दामले ने स्वागत भाषण में कहा —“हिंदू महिला सभा की स्थापना स्वातंत्र्यवीर सावरकर की प्रेरणा से हुई थी। उनके तेजस्वी विचारों का प्रभाव आज भी संस्था के हर उपक्रम में झलकता है। सावरकर ने जिस गीत का गौरव किया, उसी ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों के इस ऐतिहासिक सफर को याद करना हमारे लिए गौरव की बात है।”
कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था के नवरात्र महोत्सव की झलक दिखाने वाली एक ध्वनि-चित्रफीत प्रस्तुत की गई।कार्यक्रम का संचालन सुधा राजगुरु ने किया।



