पत्रकारों को एआई जनरेटेड कंटेंट का उपयोग करते समय जांच-परख जरूरी — प्रधान सचिव एवं महानिदेशक बृजेश सिंह
मुंबई,:कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार की गई सामग्री का उपयोग करते समय अब पत्रकारों को मानवीय जांच-पड़ताल (verification) करना अनिवार्य है।
डीपफेक सामग्री की जांच के लिए अब 15 से 20 पैमानों पर आधारित विशेष टूल्स तैयार किए जा चुके हैं।
यह जानकारी महाराष्ट्र शासन के प्रधान सचिव तथा जनसंपर्क महासंचालनालय के महानिदेशक बृजेश सिंह ने दी।
वे रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय एवं मंत्रालय-विधानमंडल वार्ताहर संघ द्वारा मंत्रालय में आयोजित
पत्रकारों हेतु “कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण कार्यशाला” में संबोधित कर रहे थे।
एआई सत्य का स्रोत नहीं
बृजेश सिंह ने कहा —
“एआई सत्य का स्रोत नहीं है। यह केवल जानकारी का रूप बदल सकता है या उसका सारांश प्रस्तुत कर सकता है,
लेकिन यह तय नहीं कर सकता कि क्या सत्य है और क्या नहीं।”
उन्होंने बताया कि नई पीढ़ी के रियल-टाइम सर्च करने वाले एआई टूल्स कई स्रोतों से जानकारी लेकर तुरंत सारांश दे सकते हैं,
जिससे पत्रकारों को संदर्भ जुटाने में सुविधा होती है।
लेकिन इस जानकारी के स्रोतों की स्वयं जांच करना पत्रकार की जिम्मेदारी है।
🔹मानवीय जांच और नियंत्रण अनिवार्य
प्रधान सचिव ने कहा कि एआई से प्राप्त संदर्भों पर यदि मानवीय पडताळणी के बिना निष्कर्ष निकाले जाएं,
तो यह खतरनाक साबित हो सकता है।
इसलिए मानवीय नियंत्रण और सत्यापन प्रक्रिया आवश्यक होनी चाहिए।
🔹ऑनलाइन डेटा और गोपनीयता पर चेतावनी
सिंह ने सावधान करते हुए कहा कि संवेदनशील या गोपनीय दस्तावेजों को ऑनलाइन टूल्स में अपलोड करने से पहले सतर्कता जरूरी है,
क्योंकि ऑनलाइन पूछे गए प्रश्न, अपलोड की गई सामग्री और खोज से जुड़ी जानकारी डिजिटल ट्रेस के रूप में सुरक्षित रहती है,
जो कानूनी जांच में प्राप्त की जा सकती है।
इसलिए पत्रकारों को ऐसी स्थिति में कानूनी व प्रणालीगत सावधानियों को समझना आवश्यक है।
🔹डीपफेक की चुनौती और नियमन
उन्होंने कहा कि अब डीपफेक बनाना बहुत आसान हो गया है,
लेकिन उसे पहचानना लगातार कठिन होता जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई जनरेटेड कंटेंट पर वॉटरमार्किंग जैसे नियमन लागू किए जा रहे हैं।
एआई कभी-कभी झूठे संदर्भ भी तैयार कर सकता है, इसलिए वैज्ञानिक या कानूनी विषयों में
पूरी तरह एआई पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण है।
🔹एआई उपयोग के लिए सुझाव
बृजेश सिंह ने कहा कि —
“एआई एक शक्तिशाली साधन है, लेकिन इसका उपयोग करते समय
स्रोत की पुष्टि, गोपनीयता की रक्षा, कानूनी जिम्मेदारियों का पालन
और मानवीय नियंत्रण — इन सभी को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।”
उन्होंने सलाह दी कि संवेदनशील जांच ऑफलाइन, एन्क्रिप्टेड और स्थानीय GPU वातावरण में करना सर्वोत्तम तरीका है।
साथ ही, तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए पत्रकारों को
नई तकनीकों और कानूनों की जानकारी के साथ स्वयं को लगातार अद्यतन रखना चाहिए।
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता पत्रकारों के लिए उपयोगी साधन है,
लेकिन सत्य की खोज में मानवीय विवेक और पडताळणी ही सर्वोच्च है।



