रीवा और मऊगंज की गौशालाओं में 20821 गौवंश को मिल रहा आश्रय
रीवा विशाल समाचार. शासन द्वारा बीमार, कमजोर तथा बेसहारा गौवंश को आश्रय देने के लिए गौशालाओं का निर्माण किया गया है। रीवा और मऊगंज जिले में मुख्यमंत्री गौसेवा योजना के तहत 101 गौशालाएं संचालित हैं। इनमें से पाँच का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा तथा शेष गौशालाओं का संचालन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जा रहा है। इन गौशालाओं में वर्तमान में 20821 गौवंश को आश्रय मिल रहा है। इस संबंध में उप संचालक पशुपालन डॉ डीपी सिंह ने 20वीं पशुधन गणना के अनुसार रीवा और मऊगंज जिले में 83450 गौवंश निराश्रित हैं। इन्हें गौशालाओं में व्यवस्थित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में निर्मित गौशालाओं की क्षमता के अनुसार गौवंश को रखने की व्यवस्था की गई है।
रीवा जिले में बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में वर्तमान में 7925 गौवंश को आश्रय दिया जा रहा है। यहाँ गौवंश के उपचार की भी समुचित व्यवस्था की गई है। गोबर से खाद, गोनाइल तथा गोकाष्ठ का भी निर्माण किया जा रहा है। गंगेव विकासखण्ड के ग्राम हिनौती में आधुनिक गौशाला का निर्माण किया जा रहा है। इसमें वर्तमान में 854 गौवंश को आश्रय दिया गया है। गौ अभ्यारण्य गौशालाओं में जिले के पशुपालक किसान और आमजन निराश्रित गौवंश को छोड़ जाते हैं। उप संचालक ने बताया कि गौवंश के बीमार होने अथवा सड़क दुर्घटना में घायल होने की सूचना मिलने पर विभाग की मोबाइल उपचार सेवा संजीवनी के माध्यम से उपचार की सुविधा दी जाती है। फोन नम्बर 1962 पर फोन लगाकर बीमार पशुओं के उपचार के लिए पशु एंबुलेंस तथा संजीवनी द्वारा उपचार सहायता प्राप्त की जा सकती है।

