पूणे

VLSID 26 पुरस्कार समारोह में डॉ. विजय भटकर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

VLSID 26 पुरस्कार समारोह में डॉ. विजय भटकर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

 

पुणे विशाल सिंह: भारतीय प्रौद्योगिकी जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण के रूप में, VLSID 26 पुरस्कार समारोह में वीएलएसआई सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. विजय पी. भटकर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। PARAM श्रृंखला के सुपरकंप्यूटरों के निर्माण तथा भारत में VLSI और उच्च-प्रदर्शन संगणना (HPC) के विकास में उनके दूरदर्शी नेतृत्व के कारण उन्हें “भारत में सुपरकंप्यूटिंग का जनक” कहा जाता है।

 

यह प्रतिष्ठित पुरस्कार वीएलएसआई सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सत्य गुप्ता के करकमलों द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर VLSID 26 आयोजन समिति के प्रमुख सदस्य शैलेश परब, वीरेश शेट्टी, सुमित गोस्वामी, हेमंत माने, महेश बुटाला, संजय घोरपड़े और रंजीत येवले उपस्थित रहे।

 

इस सम्मान के माध्यम से सेमीकंडक्टर डिजाइन, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी नेतृत्व के क्षेत्र में डॉ. भटकर द्वारा दशकों से किए गए परिवर्तनकारी योगदान को रेखांकित किया गया, जिसने भारत की VLSI पारिस्थितिकी को सशक्त आधार प्रदान किया है।

 

पुरस्कार की घोषणा होते ही सभागार में उपस्थित दर्शकों ने खड़े होकर तालियों की गूंज के साथ डॉ. भटकर का अभिनंदन किया। प्रशस्ति-पत्र में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) में उनके नेतृत्व, प्रारंभिक ASIC डिजाइन में उल्लेखनीय उपलब्धियों तथा सेमीकंडक्टर शिक्षा और नवाचार में उनके सतत मार्गदर्शक योगदान का विशेष उल्लेख किया गया।

 

डॉ. भटकर का योगदान राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना, स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग अवसंरचना के विकास और VLSI व उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में पीढ़ियों तक इंजीनियरों व शोधकर्ताओं को प्रेरित करने तक विस्तृत है। इससे पूर्व उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और महाराष्ट्र भूषण जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। VLSID 26 में प्रदान किया गया यह लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उनके अमिट योगदान और स्थायी विरासत का सशक्त प्रमाण है।

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