पूणे

मिट्ठी और संघर्ष से जुड़ा व्यक्ति ही सफलता तक पहुँचता है

मिट्ठी और संघर्ष से जुड़ा व्यक्ति ही सफलता तक पहुँचता है

 

मेक इन इंडिया’ के सपने को साकार करने जर्मनी से भारत लौटा

एल्युमिनियम मैन और तौरल इंडिया के एमडी भरत गिते का प्रतिपादन; ‘आईएमडीआर’ में ‘स्टोरीज एंड संवाद’ कार्यक्रम

 

पुणे विशाल सिंह: वैश्विक स्तर का उद्योग खड़ा करने के लिए नेतृत्व केवल पद से नहीं, बल्कि उद्देश्य के प्रति समर्पण, आत्मअनुशासन और जमीनी स्तर पर सक्रिय सहभागिता से बनता है। जो व्यक्ति अपनी मिट्टी से जुड़ा रहता है और संघर्ष के दौर से निकलकर आगे बढ़ता है, वही विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता का रास्ता खोज पाता है। भारत के प्रति प्रेम और ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को साकार करने के लिए मैंने जर्मनी में उपलब्ध बेहतर अवसर छोड़कर भारत लौटने का निर्णय लिया, यह प्रतिपादन तौरल इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं ‘एल्युमिनियम मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध भरत गिते ने किया।

 

डेक्कन एजुकेशन सोसायटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट डेवलपमेंट एंड रिसर्च (आईएमडीआर), पुणे द्वारा आयोजित ‘स्टोरीज एंड संवाद’ कार्यक्रम में गिते ने अपनी प्रेरक सफलता यात्रा साझा की। फर्ग्यूसन कॉलेज के एम्फीथिएटर में आयोजित इस कार्यक्रम में आईएमडीआर के पूर्व छात्र एवं बजाज जनरल इंश्योरेंस के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन प्रमुख निखिल भारद्वाज ने उनसे संवाद किया। इस अवसर पर आईएमडीआर की निदेशक डॉ. शिखा जैन, प्रो. अभिजीत शिवणे सहित पीजीडीएम के छात्र, प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

 

भरत गिते ने बीड जिले के परली जैसे छोटे शहर से निकलकर वैश्विक स्तर के एल्युमिनियम उद्योग की स्थापना तक के अपने ‘भरत से भारत तक’ के सफर को विस्तार से बताया। उन्होंने शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय (सीओईपी), पुणे तथा जर्मनी के विश्वविद्यालय में प्राप्त शिक्षा, साथ ही बीएमडब्ल्यू और महले जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने के दौरान मिले उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता प्रणाली और औद्योगिक संस्कृति के अनुभव साझा किए।

 

उन्होंने कहा कि विदेश में उज्ज्वल करियर की संभावनाएं होने के बावजूद ‘मेक इन इंडिया’ के लक्ष्य से प्रेरित होकर भारत लौटने का निर्णय लिया। इसी सोच से रक्षा, अंतरिक्ष, रेलवे और स्वास्थ्य क्षेत्रों के लिए काम करने वाली टौरल इंडिया की स्थापना हुई। एल्युमिनियम आधुनिक उद्योग का अत्यंत महत्वपूर्ण धातु है और यदि इसका घरेलू उत्पादन बढ़े, तो संवेदनशील क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है।

दस कर्मचारियों के साथ शुरू हुआ यह सफर आज एक हजार से अधिक कर्मचारियों तक पहुंच चुका है। चाकण, खेड़ शिवापुर और सुपा औद्योगिक क्षेत्रों में एल्युमिनियम उत्पादन इकाइयां संचालित हैं, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग का नेतृत्व यदि शॉप फ्लोर से जुड़ा रहे, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखे और कामगारों के प्रति सम्मान रखे, तो संगठन निश्चित रूप से आगे बढ़ता है।

 

गिते ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं की सशक्त भागीदारी के बिना उद्योग का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। नवाचार, आधुनिक तकनीक, ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ आगे बढ़ें, तो सफलता को कोई रोक नहीं सकता। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शिखा जैन ने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. निशिता देसाई ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन प्रो. डॉ. अभिजीत शिवणे ने किया।

 

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