
आरक्षण उपवर्गीकरण पर समाज में भ्रम न फैलाएं : –डॉ. हुलगेश चलवादी
2027 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर हो निर्णय, आरपीआई (आठवले) की स्पष्ट भूमिका
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: अनुसूचित जातियों के आरक्षण उपवर्गीकरण को लेकर समाज में विभिन्न प्रकार की अफवाहें और भ्रम फैलाए जा रहे हैं। ऐसे में समाज के लोगों को किसी भी प्रकार के भ्रम में न आने और संयम बनाए रखने की आवश्यकता है। यह बात रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने शुक्रवार को कही।
डॉ. चलवादी ने कहा कि आरक्षण उपवर्गीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) की शुरुआत से ही स्पष्ट और ठोस भूमिका रही है। पार्टी का मानना है कि इस विषय में कोई भी निर्णय वर्ष 2027 की जनगणना से प्राप्त होने वाले आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। बिना पर्याप्त और प्रमाणिक आंकड़ों के किसी भी प्रकार का निर्णय समाज के विभिन्न वर्गों के साथ न्याय नहीं कर सकेगा।
उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने समाज के नाम जारी अपने सार्वजनिक पत्र में पार्टी की भूमिका स्पष्ट रूप से रखी है। उन्होंने कहा है कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा प्रदत्त संविधान तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का सम्मान करना पार्टी की मूल प्रतिबद्धता है। संविधान की मर्यादा और कानूनी व्यवस्था के दायरे में रहते हुए ही समाजहित से जुड़े निर्णय लिए जाने चाहिए।
डॉ. चलवादी ने कहा कि अनुसूचित जातियों के किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक समाज को उसकी वास्तविक जनसंख्या और वस्तुनिष्ठ आंकड़ों के आधार पर न्याय मिलना चाहिए। इसी कारण पार्टी की मांग है कि 2027 की जनगणना के अधिकृत आंकड़े सामने आने के बाद ही सरकार इस विषय में कोई अंतिम निर्णय ले।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कुछ व्यक्ति और संगठन अधूरी तथा भ्रामक जानकारी के आधार पर समाज में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे प्रयास सामाजिक एकता के लिए हानिकारक हैं और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सामाजिक समरसता एवं एकता के विचारों के विपरीत हैं। इसलिए समाज के लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देकर केवल अधिकृत और प्रमाणिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
डॉ. चलवादी ने कहा कि रामदास आठवले ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति के सभी 59 समाज एकजुट हैं और भविष्य में भी एकजुट रहेंगे। समाज के किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो, इसके लिए वे लगातार प्रयासरत हैं और आवश्यकता पड़ने पर समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से संविधान, सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों में विश्वास बनाए रखने तथा आपसी एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसी के बल पर सामाजिक न्याय तथा समान अधिकारों की लड़ाई को मजबूत किया जा सकता है।



