महाराष्ट्र

आयुर्वेद में शोध और मानकीकरण पर अधिक जोर जरूरी

आधुनिक जीवनशैली में उपयोगी आयुर्वेद को मिल रही है वैश्विक पहचान

आयुर्वेद में शोध और मानकीकरण पर अधिक जोर जरूरी

 

आधुनिक जीवनशैली में उपयोगी आयुर्वेद को मिल रही है वैश्विक पहचान

राज्यपाल आरिफ मोहंमद खान के विचार; भारतीय आयुर्वेद संस्थान के धन्वंतरी पुरस्कार वितरित

 

पुणे विशाल समाचार: आयुर्वेद केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दृष्टि है। बदलती और तनावपूर्ण आधुनिक जीवनशैली में आयुर्वेद की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए शोध, मानकीकरण (स्टैंडर्डाइजेशन) और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर देना आवश्यक है। यह विचार बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहंमद खान ने व्यक्त किए।

 

वे भारतीय आयुर्वेद संस्थान की ओर से आयोजित राष्ट्रीय आयुर्वेद संवाद परिषद एवं राज्यस्तरीय धन्वंतरी पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम शिवाजीनगर स्थित कृषि महाविद्यालय के डॉ. शिरामाने सभागृह में आयोजित किया गया। समारोह का उद्घाटन महाराष्ट्र शासन के उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के सह सचिव रामचंद्र धनावड़े (भा.प्र.से.) के हाथों हुआ।

 

इस अवसर पर आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वैद्य रणजीत पुराणिक, वैद्य जीवन बच्छाव (आईआरएस), वैद्य संतोष नेवपूरकर, वैद्य प्रशांत बागेवाड़ीकर, वैद्य वंदना सिरोहा, वैद्य अनिल बनसोडे, वैद्य प्रियदर्शिनी कडूस और वैद्य किरण पंडित को राज्यपाल के हाथों ‘आयुर्वेद गौरव (धन्वंतरी) पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

 

राज्यपाल खान ने कहा कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित आयुर्वेद की अवधारणा आज के समय में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। भविष्य में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (प्रिवेंटिव्ह हेल्थकेयर) में आयुर्वेद की भूमिका निर्णायक हो सकती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों की रक्षा करें और शोध की दिशा में आगे बढ़ें।

परिषद के पहले सत्र में वैद्य किरण पंडित ने आयुर्वेद शिक्षा प्रणाली की दिशा, संभावनाओं और राष्ट्रीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। विश्वानंद आयुर्वेद चिकित्सालय एवं गुरुकुल के संचालक वैद्य अनिल बनसोडे ने ‘आयुर्वेद प्रैक्टिस कैसे शुरू करें और उसे कैसे विकसित करें’ विषय पर प्रायोगिक प्रस्तुति के माध्यम से मार्गदर्शन किया।

 

वहीं श्री आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल के संचालक वैद्य प्रशांत दौंडकर-पाटील ने आयुर्वेद ओपीडी, हॉस्पिटल पंजीकरण, ओपीडी-आईपीडी पंचकर्म सेवाओं के लिए कैशलेस मेडिक्लेम एम्पैनलमेंट प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।

 

आयुर्वेद संवाद सत्र में श्री धूतपापेश्वर प्रा. लि. के सीईओ वैद्य रणजीत पुराणिक, आयुर्वेद व्यासपीठ के पूर्व अध्यक्ष वैद्य संतोष नेवपूरकर, बागेवाड़ीकर आयुर्वेद रसशाला के संचालक वैद्य प्रशांत बागेवाड़ीकर और भारत सरकार के आयुष मंत्री के निजी सचिव वैद्य जीवन बच्छाव ने आयुर्वेद के ऐतिहासिक सफर, आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसकी भूमिका, वैद्यों के समक्ष आने वाली चुनौतियों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय अवसरों पर अपने विचार रखे। इस संवाद सत्र का संचालन वैद्य हरीश पाटणकर और वैद्य प्रेरणा बेरी ने किया।

 

कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय आयुर्वेद संस्थान के कार्याध्यक्ष वैद्य प्रशांत दौंडकर-पाटील, सचिव संकेत खरपुडे सहित वैद्य सुकुमार सरदेशमुख, वैद्य राहुल शेलार, वैद्य प्रिया दौंडकर-पाटील और वैद्य सोनल सोमानी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम को श्री आयुर्वेद एंड पंचकर्म हॉस्पिटल तथा वर्मा फाउंडेशन का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।

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