
दृष्टिबाधित छात्रों के लिए देश की पहली टैक्टाइल गणित प्रयोगशाला
एमआईटी अकादमी ऑफ इंजीनियरिंग, आळंदी की पहल; ‘जागृति स्कूल फॉर ब्लाइंड गर्ल्स’ में स्थापना
पुणे विशाल समाचार: दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की शिक्षा को अनुभवात्मक और समावेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए एमआईटी अकादमी ऑफ इंजीनियरिंग (एमआईटी एओई), आळंदी ने देश की पहली टैक्टाइल (स्पर्शाधारित) गणित प्रयोगशाला स्थापित की है। यह प्रयोगशाला टेक महिंद्रा फाउंडेशन के ‘अराइज प्लस’ कार्यक्रम के अंतर्गत सीएसआर सहयोग से एनएफबीएम जागृति स्कूल फॉर ब्लाइंड गर्ल्स में शुरू की गई है। इससे दृष्टिबाधित छात्र अब गणितीय अवधारणाओं को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझ सकेंगे।
इस प्रयोगशाला का उद्घाटन केंद्रीय आयकर विभाग के प्रधान आयुक्त संग्राम गायकवाड के हस्ते हुआ। इस अवसर पर स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड इंजीनियरिंग साइंसेज की प्रमुख डॉ. पूजा वर्मा, परियोजना समन्वयक प्रो. हुसैन शेख, ‘अराइज प्लस’ की प्रतिनिधि प्रिया कुलकर्णी, डॉ. ज्ञानेश्वर जाधव, प्रो. बी. आर. पाटील, प्रो. गवाने सर, जागृति स्कूल की प्रधानाचार्या वानखेडे मैडम, तथा छात्र समन्वयक राजवीर पाटील, वैष्णवी बनसोडे, ओमकुमार राजपूत और ओम कोलते उपस्थित थे।
उद्घाटन समारोह में संग्राम गायकवाड ने कहा कि ऐसे प्रकल्प विद्यार्थियों में केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सहानुभूति भी विकसित करते हैं। उन्होंने कहा, “समाज के वंचित वर्गों के लिए कार्य करना ही सच्ची सामाजिक सेवा है। राष्ट्रीय सेवा योजना जैसे मंचों को ऐसे उपक्रमों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थापित यह प्रयोगशाला समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
इस गणित प्रयोगशाला में उपयोग किए गए सभी स्पर्शाधारित गणितीय मॉडल एमआईटी एओई के विद्यार्थियों ने ‘वेव्स’ (WAVES) पहल के अंतर्गत विकसित किए हैं। बिना किसी दृश्य माध्यम के, स्पर्श, आकार, बनावट, अनुपात और गति के आधार पर गणितीय संकल्पनाओं को समझाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे विद्यार्थियों ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह उपक्रम तकनीकी शिक्षा, सामाजिक दायित्व और समावेशी शिक्षा का एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरा है। उपस्थित मान्यवरों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रयोगशाला दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के शैक्षणिक सफर में नए अवसर खोलेगी और देशभर में समावेशी शिक्षा के लिए प्रेरणादायी मॉडल बनेगी।


