
पुणे-पिंपरी चिंचवड़ की बढ़ती बिजली मांग को लेकर बनेगा विस्तृत प्लान, उपकेंद्रों के लिए जनप्रतिनिधियों की मदद लेने के निर्देश
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे, महाराष्ट्र
पुणे,। पुणे और पिंपरी चिंचवड़ महानगरों की तेजी से बढ़ती बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महावितरण और महापारेषण कंपनी को बिजली विकास का विस्तृत खाका तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। ऊर्जा राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने कहा कि इस योजना को बनाते समय नगर निगम और महावितरण के बीच समन्वय जरूरी है। साथ ही जहां नए बिजली उपकेंद्र प्रस्तावित हैं या भविष्य में आवश्यक होंगे, वहां जमीन उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मदद ली जाए, ताकि भूमि संबंधी समस्याएं शीघ्र सुलझाई जा सकें और नागरिकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके।
गणेशखिंड स्थित प्रकाश भवन में आयोजित बैठक में पुणे और पिंपरी चिंचवड़ शहरों की बिजली समस्याओं की समीक्षा की गई। बैठक में महापौर मंजुषा नागपुरे, विधायक बापूसाहेब पठारे, शंकर जगताप, योगेश टिळेकर, अमित गोरखे सहित महावितरण के मुख्य अभियंता सुनील काकड़े (पुणे) और धर्मराज पेठकर (बारामती), महापारेषण के मुख्य अभियंता अनिल कोलप तथा दोनों नगर निगमों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में भूमिगत विद्युत लाइनों का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि भूमिगत लाइनों के कार्य में खुदाई शुल्क अत्यधिक होने के कारण परियोजनाओं पर असर पड़ रहा है, क्योंकि कई बार खुदाई का खर्च ही कुल लागत से कई गुना अधिक हो जाता है। इस पर महावितरण अधिकारियों ने सुझाव दिया कि पिंपरी चिंचवड़ की तर्ज पर पुणे नगर निगम भी नाममात्र शुल्क लेकर और सड़कों को पूर्ववत करने की शर्त पर अनुमति प्रदान करे। इस पर राज्यमंत्री ने पुणे में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया।
दोनों शहरों में 30 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं और शहरों के विस्तार के साथ उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। अधिक लोड के कारण बिजली लाइनों में बार-बार खराबी आ रही है। इस समस्या के समाधान के लिए सड़कों के किनारे अलग से भूमिगत मार्गिका (डक्ट) विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे आपात स्थिति में लाइनों की मरम्मत और बदलाव शीघ्रता से किया जा सके। इस प्रस्ताव को स्मार्ट सिटी की दृष्टि से आवश्यक बताते हुए जनप्रतिनिधियों ने भी समर्थन दिया।
बैठक में चल रही विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए राज्यमंत्री ने कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही नए निर्माण कार्यों को अनुमति देते समय डेवलपर्स से बिजली उपकेंद्र और फीडर पिलर के लिए भूमि आरक्षित कराने के नियम बनाने की बात कही गई। स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विषय समितियां गठित करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। विधायक शंकर जगताप ने देहूरोड शाखा का विभाजन कर मामुर्डी में नया कार्यालय खोलने का सुझाव दिया और इसके लिए स्थान उपलब्ध कराने की इच्छा जताई। विधायक बापूसाहेब पठारे ने वडगांव शिंदे और वाघोली क्षेत्र के मुद्दे उठाए, जबकि योगेश टिळेकर ने भूमिगत लाइनों के लिए अलग नीति बनाने की मांग की। विधायक अमित गोरखे ने झोपड़पट्टी क्षेत्रों में ओवरहेड लाइनों को भूमिगत करने की आवश्यकता बताई। महापौर मंजुषा नागपुरे ने समतानगर और गणेशमाला क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से बिजली लाइनों को भूमिगत करने का सुझाव दिया। बैठक में इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।


