
भ्रूण प्रत्यारोपण एवं इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक के संयुक्त क्रियान्वयन हेतु ‘महापशुधन एक्सपो’ में समझौता
देशी गोवंश संरक्षण एवं दुग्ध उत्पादन वृद्धि को मिलेगा प्रोत्साहन
रिपोर्ट : विशाल समाचार संवाददाता
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे : राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय राहुरी अंतर्गत देशी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कृषि महाविद्यालय, पुणे तथा महाराष्ट्र पशुधन विकास मंडल, पशुपालन विभाग, महाराष्ट्र शासन के मध्य भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के क्रियान्वयन हेतु परली वैजनाथ में आयोजित ‘महापशुधन एक्सपो’ के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह जानकारी देशी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सोमनाथ माने ने दी।
इस अवसर पर पशुपालन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे तथा विधायक धनंजय मुंडे भी उपस्थित थे।
डॉ. माने ने बताया कि महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय, राहुरी तथा महाराष्ट्र पशुधन विकास मंडल के मध्य भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक एवं इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक के संयुक्त क्रियान्वयन हेतु यह समझौता किया गया है। इसके माध्यम से राज्य में देशी गोवंश संरक्षण तथा दुग्ध उत्पादन वृद्धि को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
देशी गाय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र द्वारा गोवंश संरक्षण एवं उन्नयन कार्यक्रम के अंतर्गत भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के उपयोग से उच्च वंशावली तथा अधिक दुग्ध उत्पादन देने वाली देशी गायों के विकास का महत्वाकांक्षी अभियान संचालित किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र में 100 से अधिक उच्च वंशावली वाली देशी बछियों का सफल जन्म हो चुका है, जो राज्य के पशुधन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
महाराष्ट्र शासन के पशुपालन विभाग द्वारा स्थापित ‘ईटी-आईवीएफ’ प्रयोगशालाओं के माध्यम से राज्यभर में देशी गायों की उच्च वंशावली वाली बछियों का उत्पादन किया जा रहा है। इस समझौते के अंतर्गत सहीवाल, गिर, राठी, रेड सिंधी, थारपारकर सहित खिल्लार एवं डांगी जैसी दुग्ध उत्पादक देशी नस्लों की उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली बछियों को किसानों के स्तर पर विकसित किया जाएगा।
इस पहल के तहत किसानों की संकरित गायों में उच्च गुणवत्ता वाले देशी भ्रूण का प्रत्यारोपण कर सफल गर्भधारण दर में वृद्धि पर विशेष बल दिया जाएगा। प्राप्तकर्ता गायों का चयन, समन्वय, प्रत्यारोपण उपरांत गर्भधारण परीक्षण तथा अभिलेख प्रबंधन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के पास रहेगी, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण की उपलब्धता, ओपीयू-आईवीएफ प्रक्रिया एवं तकनीकी क्रियान्वयन महाराष्ट्र पशुधन विकास मंडल द्वारा किया जाएगा।
इस संयुक्त पहल से महाराष्ट्र में देशी गोवंश संरक्षण, आनुवंशिक सुधार एवं दुग्ध उत्पादन वृद्धि को गति मिलने के साथ ही किसानों की आय में वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की गई है।


