
विश्वकर्मा कारीगरों के उत्पादों का राज्यस्तरीय प्रदर्शनी एवं बिक्री मेला आयोजित
डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाकर अपनी पहचान बनाएं – रविंद्र साठे
रिपोर्ट: विशाल समाचार संवाददाता
स्थान:पुणे,महाराष्ट्र
पुणे, कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। प्रत्येक विश्वकर्मा कारीगर को डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करनी चाहिए। यह आह्वान महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल के अध्यक्ष रविंद्र साठे ने किया।
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के विकास एवं सुविधा कार्यालय, मुंबई तथा महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में प्रधानमंत्री कौशल सम्मान योजना के अंतर्गत 13 से 15 फरवरी 2026 तक सोनल हॉल प्रदर्शन सेंटर में आयोजित विश्वकर्मा कारीगरों की राज्यस्तरीय प्रदर्शनी, बिक्री एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर वे संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर मंत्रालय के विकास एवं सुविधा कार्यालय के निदेशक मिलिंद बारापत्रे, इंडो जर्मन टूल रूम के उपाध्यक्ष सुहास इंगळे, एक्सेलेंसी के प्रबंध निदेशक श्रीकांत सारडा, जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक अर्चना कोठारी, एमएसएमई के सह-निदेशक अभय दफ्तरदार, जिला संचालन समिति के सदस्य विकास जगताप एवं धर्मेंद्र खांडरे सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
श्री साठे ने कहा कि ‘लोकल फॉर वोकल’ की अवधारणा के माध्यम से विश्वकर्मा कारीगरों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर देशीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थान प्राप्त करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया तथा विश्वकर्मा योजना जैसी पहलें प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराना एवं उनका सशक्तिकरण करना इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य है। यह प्रदर्शनी आम नागरिकों के लिए खुली है तथा पुणे के नागरिकों से तीन दिवसीय मेले में सहभागिता कर स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया गया।
प्रदर्शनी में 67 स्टॉल्स की सहभागिता
प्रदर्शनी में बढ़ईगिरी, लोहारगिरी, स्वर्णकारी, माला निर्माण, कुम्हारकला, मूर्तिकला, सिलाई, चर्मशिल्प, बुटिक कार्य, पत्थर नक्काशी एवं खिलौना निर्माण जैसे पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कुल 67 स्टॉल्स लगाए गए हैं। कोल्हापुरी चप्पल, पर्स, आकर्षक बुटिक साड़ियां, परिधान एवं महिलाओं के लिए आभूषणों को विशेष प्रतिसाद मिल रहा है।
कार्यक्रम का संचालन राज्य समन्वयक अभय रावेतकर ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन जिला ग्रामोद्योग अधिकारी रमेश सुरुंग द्वारा किया गया।
