
प्रगतिशील महाराष्ट्र को केरल से प्रेरणा लेनी चाहिए: डॉ. हुलगेश चलवादी
रिपोर्ट :विशाल समाचार संवाददाता
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे: शिक्षा नगरी पुणे से राज्य सरकार को ‘लाडके विद्यार्थी’ योजना शुरू कर गरीब, प्रतिभाशाली तथा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के द्वार खोलने चाहिए। यह अपील शिक्षा क्षेत्र के जानकार, बहुजन नेता एवं पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने रविवार को की।
उन्होंने कहा कि केरल राज्य ने सरकारी तथा सरकारी अनुदानित कला एवं विज्ञान महाविद्यालयों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क कर दिए हैं। इसी तर्ज पर महाराष्ट्र सरकार को भी सभी संकायों में स्नातक स्तर तक की शिक्षा निःशुल्क कर विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करना चाहिए।
डॉ. चलवादी के अनुसार, वर्तमान में एससी-एसटी वर्ग के विद्यार्थियों को आरटीई के तहत केवल आठवीं कक्षा तक ही निःशुल्क शिक्षा मिलती है। इसके बाद आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए आगे की शिक्षा कठिन हो जाती है, जिससे उन पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले ने पुणे से ही शैक्षणिक और सामाजिक क्रांति की नींव रखी थी। वहीं छत्रपति शाहू महाराज ने आरक्षण लागू कर समाज के सभी वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोले थे। उनके विचारों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र में सभी के लिए शिक्षा निःशुल्क की जानी चाहिए।
राज्य में कक्षा 9 और 10 के दौरान विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों में लड़कों का प्रतिशत 12.6% तथा लड़कियों का प्रतिशत 10.3% है। शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के इन आंकड़ों में वर्ष 2023-24 की तुलना में 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्य में प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी आर्थिक कारणों से स्नातक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
ऐसी स्थिति में यदि महाराष्ट्र सरकार कला, विज्ञान, वाणिज्य तथा अन्य महत्वपूर्ण संकायों के लिए चरणबद्ध तरीके से शुल्कमाफी लागू करती है, तो सामाजिक न्याय एवं शैक्षणिक समानता के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। शिक्षा पर होने वाला खर्च बोझ नहीं, बल्कि भविष्य में किया गया निवेश है — यह बात केरल ने सिद्ध की है। महाराष्ट्र को भी विद्यार्थियों के हित में इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

