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आठ महीने दबा सच, रिटायरमेंट के बाद भी सवाल अधूरा

जुलाई से लगातार शिकायत दर्ज, आईटीआर रिपोर्ट अधूरी, प्रशासन की चुप्पी और संभावित संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

आठ महीने दबा सच, रिटायरमेंट के बाद भी सवाल अधूरा

 

जुलाई से लगातार शिकायत दर्ज, आईटीआर रिपोर्ट अधूरी, प्रशासन की चुप्पी और संभावित संरक्षण पर उठे गंभीर सवाल

रिपोर्ट: देवेन्द्र सिंह तोमर

स्थान: इटावा, उत्तर प्रदेश

इटावा में पिछले आठ महीनों से लगातार दर्ज की जा रही शिकायतों पर प्रशासनिक कार्रवाई न होना अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल बन गया है। शिकायतकर्ता ने जुलाई 2025 से संबंधित विभागों में लगातार शिकायतें दर्ज कर जांच की मांग की, और सभी आवश्यक दस्तावेज़, प्रमाण और आईटीआर प्रस्तुत किए।

फिर भी, आज तक किसी अधिकारी ने संपर्क तक नहीं किया। वहीं बैंक भी लगातार जाँच की प्रक्रिया में ठहराव डालते रहे।

लोकल मीडिया और विशाल समाचार चैनल पर लगातार रिपोर्टिंग के बावजूद, प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई।

रिटायरमेंट और कार्रवाई का संकट

आज अचानक डीपीआरओ को समय से पहले रिटायरमेंट दे दिया गया। यह तब हुआ जब एडीएम ने उनकी जिम्मेदारी में दोषी ठहराते हुए रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी थी। रिटायरमेंट के साथ ही सवाल उठते हैं कि जांच अब किस स्तर पर पूरी होगी।

आईटीआर और अन्य दस्तावेज़ अभी तक सिस्टम में पूरी तरह दर्ज नहीं हुए।

रिटायरमेंट के बावजूद मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।

प्रशासन और राजनीतिक प्रभाव के संभावित संरक्षण की चर्चा भी प्रशासनिक गलियारों में सामने आई है।

जनता और मीडिया की भूमिका

लोकल मीडिया और वायरल वीडियो ने प्रशासनिक हलचल तेज की, लेकिन वास्तविक कार्रवाई अभी तक देखने को नहीं मिली। शिकायतकर्ता ने लगातार अपनी आवाज़ उठाई और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मामले को सार्वजनिक किया।

सवाल उठते हैं

क्या बिना राजनीतिक या उच्च प्रशासनिक हस्तक्षेप के इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई संभव थी?

जब शिकायतकर्ता को आठ महीनों में एक कॉल तक नहीं किया गया, तो जांच प्रक्रिया कहाँ रुकी?

रिटायरमेंट के बाद भी क्या उच्च स्तर से जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी?

फिलहाल, पूरे इटावा और प्रदेश की निगाहें इस मामले पर टिकी हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सिस्टम की जवाबदेही और जनता की आवाज़ का सम्मान करेगा, या मामला प्रभाव और संरक्षण के बीच ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

डीपीआरओ, जिनके खिलाफ एडीएम ने दोषी ठहराया और रिपोर्ट भेजी, आज समय से पहले रिटायर हो गए।”

वहां यूपी सरकार दोषी अधिकारियों को समय से पहले रिटायरमेंट दे देती है और इतना ही नहीं, फूल मालों से स्वागत कर देती है। क्या यह शर्म की बात नहीं? सवाल उठाना जरूरी है: क्या यह योगी सरकार की जीरो न्याय व्यवस्था है? जांच अधूरी छोड़ दी गई, और आठ महीनों में एक भी बार शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं किया गया। अब मुख्यमंत्री महोदय से जनता और मीडिया जानना चाहती है: ऐसा क्यों रिटायरमेंट दिया गया? जनता आपसे न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है

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