
इटावा बिजली बिल घोटाला: उपभोक्ताओं के साथ सबसे बड़ा धोखा और कमिशन का पर्दाफाश
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा/यूपी : उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में छूट का झांसा देकर 10 महीने तक भारी ब्याज वसूला गया, और अब खुलासा हुआ है कि जनवरी 2026 से आ रहे बिल भी बढ़कर भेजे जा रहे हैं, ताकि कर्मचारियों को असामान्य कमिशन मिलता रहे।
फरवरी 2025 तक बिलों पर छूट देने का विज्ञापन कर जनता को लुभाया गया। लेकिन असल में मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2025 तक के बिलों पर 10 महीने का ब्याज लगाया गया। जिन उपभोक्ताओं ने 31 दिसंबर 2025 तक बिल जमा किया, उन्हें केवल फरवरी 2025 तक की छूट दी गई।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रेस रिलीज के माध्यम से दावा किया कि उपभोक्ताओं को दिसंबर 2025 तक बिलों में छूट दी जा रही है। विशाल समाचार की पड़ताल में यह साबित हुआ कि यह बयान मात्र भ्रामक और झूठा भौकाल था। जब विभागीय जे.ई. से संपर्क किया गया, तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि असल में केवल फरवरी तक छूट थी।
इटावा शहर के बिजली कर्मचारियों की कमिशन खुराफात भी सामने आई। एक कर्मचारी ने विशाल समाचार को बताया कि रीडिंग मीटर की यूनिटों को 15–20 यूनिट तक बढ़ा दिया जाता है, जिससे उन्हें मोटा कमिशन मिलता है। उन्होंने अपना नाम प्रकाशित होने से मना किया। यही कारण है कि जनवरी 2026 से बिल बढ़कर आ रहे हैं।
विशाल समाचार की पड़ताल से यह स्पष्ट हो गया कि उपभोक्ताओं के साथ सिर्फ अफसरों और कर्मचारियों की मनमानी नहीं, बल्कि व्यवस्थित भ्रष्टाचार और कमिशन घोटाला चल रहा है। उपभोक्ताओं को लगातार झूठे विज्ञापन और प्रेस रिलीज के माध्यम से भ्रमित किया गया।
उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी:

(“इटावा: विद्युत वितरण निगम का अधिशासी अभियंता कार्यालय – स्थानीय बिजली प्रबंधन का केंद्र।”)
अपने बिलों की सावधानीपूर्वक जाँच करें।
किसी भी अनियमितता की शिकायत तुरंत दर्ज कराएँ।
बढ़े हुए बिल और ब्याज के कारण होने वाले नुकसान से बचें।
मुख्य खुलासे:
फरवरी 2025 तक छूट का झूठा प्रचार।
मार्च–दिसंबर 2025 तक के बिलों पर 10 महीने का ब्याज।
दिसंबर तक बिल जमा करने वालों को केवल फरवरी तक की छूट।
जनवरी 2026 से बढ़े हुए बिल, कर्मचारी कमिशन के लिए।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा का प्रेस रिलीज भ्रामक।
कर्मचारी नाम गुप्त रखते हुए खुलासा कर रहे हैं।
यह मामला केवल उपभोक्ताओं की आर्थिक प्रताड़ना नहीं है, बल्कि सिस्टम और विभागीय अधिकारियों द्वारा धोखा, झूठ और भ्रष्टाचार का बड़ा खेल है।
विशाल समाचार ने इस घोटाले की तह तक जाकर पूरी सच्चाई उजागर की है। उपभोक्ताओं को सचेत रहने की आवश्यकता है।



