
वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तेजी से शिक्षा, प्रशासन और समाज के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में इसका उपयोग नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के साथ किया जाना अत्यंत आवश्यक है।–जिलाधिकारी
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:सीतामढ़ी बिहार
डायट, डुमरा में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), डुमरा, सीतामढ़ी में शुक्रवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय “नैतिक विवेक की शक्ति के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” रखा गया। कार्यक्रम का उद्घाटन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा, महाराष्ट्र के डॉ. Gopal Krishna Thakur, केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ की डॉ. Kiranlata Gandwal, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी की डॉ. Rashmi Srivastava, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी Nagma Shadab तथा डायट की प्राचार्या Kumari Archana सहित संस्थान के सभी व्याख्याताओं द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तेजी से शिक्षा, प्रशासन और समाज के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में इसका उपयोग नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के साथ किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि तकनीक का उपयोग विवेक, जिम्मेदारी और नैतिक दृष्टिकोण के साथ किया जाए तो यह समाज के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एआई का उपयोग शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक और परिणामोन्मुख बना सकता है। उन्होंने शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को नई तकनीकों को सीखने तथा उन्हें सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास के इस दौर में युवाओं और शिक्षकों के लिए कौशल विकास और क्षमता संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रकार के सेमिनार न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान का मंच प्रदान करते हैं, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों को नई सोच और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हुए आधुनिक तकनीकों का संतुलित उपयोग ही आने वाले समय में समाज को सही दिशा प्रदान कर सकता है।
सेमिनार में विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, शिक्षा में इसके उपयोग तथा नैतिकता के महत्व पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में संस्थान के व्याख्याताओं, प्रशिक्षुओं एवं शिक्षकों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया

