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बहारदार गायन के साथ पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव का शुभारंभ

बहारदार गायन के साथ पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव का शुभारंभ

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान: पुणे महाराष्ट्र

पुणे, (विशाल सिंह)। सुरों की मधुर गूंज, तबले की थाप, तालियों की लय और हार्मोनियम की सुमधुर संगत के बीच पंडित जितेंद्र अभिषेकी संगीत महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ।

कोथरूड स्थित Yashwantrao Chavan Natyagruha में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन महापौर Manjusha Nagpure की प्रमुख उपस्थिति में हुआ। ‘आपला परिसर’ और Tarangini Cultural Pratishthan द्वारा आयोजित इस 20वें महोत्सव में संयोजक उज्ज्वल केसकर, प्रख्यात गायक Shaunak Abhisheki, प्रवीण बढेकर, विनोद पालेकर, पूर्वा केसकर, वरिष्ठ गायिका आशा खाडिलकर, रवींद्र खरे और महेश पानसे सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

संगीत क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ गायिका शैला दातार को ‘पंडित जितेंद्र अभिषेकी प्रदीर्घ संगीत सेवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जबकि जयंत केजकर को ‘प्रथितयश पुरस्कार’ प्रदान किया गया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद शैला दातार ने कहा कि पंडित जितेंद्र अभिषेकी के नाम से जुड़ा यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि अभिषेकी के मार्गदर्शन से ही उन्हें संगीत शिक्षा के अवसर मिले और वे इसी प्रेरणा के साथ अपनी साधना जारी रखे हुए हैं।

संयोजक उज्ज्वल केसकर ने बताया कि ‘आपला परिसर’ और तरंगिनी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान का 24 वर्षों का सशक्त सांस्कृतिक संबंध रहा है, जिसके तहत अब तक 700 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि Shaunak Abhisheki के प्रयासों से देशभर के नामी कलाकार इस महोत्सव से जुड़े हैं।

महोत्सव की शुरुआत में राजयोग धुरी, अंजली गायकवाड, विश्वजीत मिस्त्री और नंदिनी गायकवाड ने अपने सुमधुर गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। नंदिनी गायकवाड ने ‘मत्स्यगंधा’ नाटक के प्रसिद्ध पद ‘देवाघरचे ज्ञात कुणाला’ से कार्यक्रम का आगाज किया। इसके बाद ‘धन्य धन्य शंखराज’ और ‘गगनावरी घुमती नाद’ जैसे गीतों की प्रस्तुति दी गई।

अंजली गायकवाड ने ‘हे बंध रेशमाचे’ नाटक के ‘आज सुगंध आला लहरत’ और ‘काटा रुते कुणाला’ जैसे भावपूर्ण गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं से खूब सराहना बटोरी और संगीत नाटक के स्वर्णिम दौर की यादें ताजा कर दीं।

वादक कलाकारों में उदय कुलकर्णी (ऑर्गन), सुगात कोरगांवकर (हार्मोनियम), रामकृष्ण करंबळेकर (तबला), ज्ञानेश्वर दूधाने (पखवाज) और शिरीष जोशी (ताल) ने उत्कृष्ट संगत दी। इन सभी कलाकारों का महापौर के हाथों सम्मान किया गया।

इस अवसर पर महापौर Manjusha Nagpure ने कहा कि तरंगिनी सांस्कृतिक प्रतिष्ठान और ‘आपला परिसर’ द्वारा पिछले 20 वर्षों से इस संगीत महोत्सव का निरंतर आयोजन किया जाना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि पुणे जैसे संगीतप्रेमी और पारखी श्रोताओं के सामने लगातार उच्च स्तरीय कार्यक्रम प्रस्तुत करना बड़ी उपलब्धि है।

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