
इटावा में खाकी पर सवाल: महिला की शिकायत के बाद थानेदार लाइन हाजिर, जांच प्रक्रिया पर उठे गंभीर प्रश्न
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा। बलरई थाना क्षेत्र से सामने आया मामला एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहा है। महिला की शिकायत के बाद थाना प्रभारी निरीक्षक दिवाकर सरोज को लाइन हाजिर कर दिया गया है, लेकिन इस कार्रवाई ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना 4 मार्च को हुई लूट और मारपीट से जुड़ी है। इस मामले में दर्ज मुकदमे को लेकर प्रिया चौहान नामक महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति, देवर और भाई को जानबूझकर झूठे मुकदमों में फंसाया गया। महिला का कहना है कि मामूली विवाद को गंभीर धाराओं में बदल दिया गया और पुलिस ने उनकी बात सुनने के बजाय एकतरफा कार्रवाई की।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोधी पक्ष से मिलीभगत कर उनके परिवार पर दबाव बनाया। समझौते के नाम पर लाखों रुपये की मांग की गई और पूरे प्रकरण में निष्पक्षता नहीं बरती गई। लगातार दबाव और अनसुनी के बाद महिला ने मामला प्रभारी मंत्री धर्मवीर प्रजापति तक पहुंचाया।
शिकायत सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी जसवंतनगर थानाध्यक्ष कमल भाटी को सौंपी गई। जांच के दौरान रिश्वत मांगने का आरोप प्रमाणित नहीं हो सका, लेकिन पूरे मामले, पुलिस की कार्यशैली और लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक को लाइन हाजिर कर दिया गया।
गौरतलब है कि दिवाकर सरोज का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। फरवरी 2024 में उन्हें फ्रेंड्स कॉलोनी थाने का प्रभारी बनाया गया था, लेकिन लगातार शिकायतों के चलते कुछ ही महीनों में उन्हें वहां से हटा दिया गया था। इससे उनकी कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
फिलहाल विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या पुलिस की कार्रवाई वास्तव में निष्पक्ष होती है, या फिर हर बार पीड़ित को आवाज उठाने और दबाव बनाने के बाद ही सिस्टम जागता है।
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