
“गोंगाट में विचार न खोएं” — 25 साल पुरानी स्पीकर परंपरा खत्म, 1000 अनुयायियों को पुस्तक वितरण और मूक नाटक का ऐतिहासिक आयोजन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे :भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर पुणे स्टेशन स्थित उनके प्रतिमा स्थल पर इस वर्ष एक अनूठा और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। ‘भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर केंद्रीय जयंती महोत्सव समिति’ के आह्वान पर भीमसेवा प्रतिष्ठान और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पिछले 25 वर्षों से चली आ रही तेज आवाज वाले स्पीकर (डीजे) की परंपरा को इस बार स्थायी रूप से समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
पुस्तकों के माध्यम से विचारों का प्रसार :
मिरवणूक (जुलूस) में अत्यधिक ध्वनि से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए तथा हाल की दुखद घटनाओं से सीख लेते हुए इस वर्ष स्पीकर पर होने वाले भारी खर्च को बचाकर 1000 अनुयायियों को महापुरुषों के विचारों से संबंधित पुस्तकें निःशुल्क वितरित की जाएंगी। “पढ़ोगे तो बढ़ोगे” के संदेश को व्यवहार में लाने का यह प्रयास किया जा रहा है।
विशेष आकर्षण : 30 फीट का बुद्ध स्वरूप और मूक नाटक
इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण 30 फीट ऊंचा तथागत बुद्ध का भव्य स्वरूप होगा। साथ ही “गोंगाट में विचार न खोएं” संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तथागत बुद्ध, सम्राट अशोक और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन पर आधारित ‘तीन पात्रों का मूक नाटक’ (साइलेंट प्ले) प्रस्तुत किया जाएगा। शोर-शराबे के बजाय शांति के माध्यम से विचारों को जागृत करना ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।
यह निर्णय संस्थापक अध्यक्ष रामभाऊ डंबाले, मार्गदर्शक राहुल डंबाले और रिपब्लिकन नेत्री सुवर्णा डंबाले के मार्गदर्शन में सिद्धांत सुर्वे, प्रदीप कांबले, निखिल बहुले, अविराज मराठे और नासिर खान सहित अन्य कार्यकर्ताओं द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया है।
समिति की अपील :
पुणे स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में आने वाले अनुयायियों को ध्यान में रखते हुए ध्वनि प्रदूषण से बचने तथा वरिष्ठ नागरिकों और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए समिति के अध्यक्ष राहुल डंबाले ने अन्य मंडलों से भी स्पीकर का उपयोग न करने की अपील की है।



