
सूर्यदत्त के छात्रो ने की वैश्विक शांति के लिए पीएम से पहल की अपील
पुणे के 300 छात्रों ने सौंपा सामूहिक ज्ञापन; प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने की सराहना
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: शहर के सूर्यदत्त नेशनल स्कूल के 300 से अधिक छात्रों ने वैश्विक शांति की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi से हस्तक्षेप करने और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त करने में नेतृत्व करने की अपील की है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर छात्रों ने सामूहिक रूप से एक ज्ञापन तैयार कर प्रधानमंत्री को भेजा।
छात्रों ने अपने ज्ञापन में बढ़ते वैश्विक संघर्षों पर चिंता जताते हुए भारत से एक तटस्थ और विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि संवाद और समन्वय के माध्यम से ही स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।
भारतीय दर्शन से प्रेरणा लेते हुए छात्रों ने Mahatma Gandhi और Gautama Buddha की शिक्षाओं का उल्लेख किया। ‘अहिंसा’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांतों को वैश्विक शांति के लिए मार्गदर्शक बताते हुए छात्रों ने युद्ध के मानवीय दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युद्ध का सबसे अधिक असर निर्दोष नागरिकों, खासकर बच्चों पर पड़ता है।
छात्रों ने वैश्विक शांति के लिए सात सूत्रीय प्रस्ताव भी रखा है। इसमें United Nations और NATO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए लगभग 200 देशों की भागीदारी के साथ ‘ग्लोबल पीस वोट’ आयोजित करने, भारत द्वारा मध्यस्थ की भूमिका निभाने, संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम लागू करने, अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सैन्य वापसी, परमाणु हथियारों पर सख्त वैश्विक प्रतिबंध, तथा युद्ध में खर्च होने वाले संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में लगाने जैसे सुझाव शामिल हैं। साथ ही, मानव जीवन और बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
इस पहल की सराहना करते हुए सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. Sanjay B. Chordiya ने कहा कि शिक्षा केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संवेदनशीलता, मूल्य और जिम्मेदारी भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के विचार वैश्विक शांति के लिए एक सकारात्मक दिशा दिखाते हैं।
छात्रों ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया में नफरत के बजाय प्रेम और संघर्ष के बजाय संवाद का मार्ग अपनाया जाना चाहिए, और इस दिशा में भारत को नेतृत्व करना चाहिए।
यह पहल प्रो. संजय बी. चोरडिया के मार्गदर्शन में, सुषमा चोरडिया, स्नेहल नवलखा, स्कूल की प्राचार्या तथा शिक्षकों और कर्मचारियों के सहयोग से संपन्न हुई।


