
जिला परिषद सदस्यों की विकासात्मक सोच से ग्राम विकास को मिलेगी नई गति : मंत्री जयकुमार गोरे
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : ग्राम विकास में जिला परिषद सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि वे विकासात्मक दृष्टिकोण अपनाकर कार्य करें, तो गांवों के विकास को नई गति मिल सकती है। इसके लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होंगे। यह विचार महाराष्ट्र के ग्राम विकास मंत्री Jaykumar Gore ने व्यक्त किए।
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और राज्य ग्रामीण विकास संस्था (यशदा) के संयुक्त तत्वावधान में पुणे स्थित Yashda में हाल ही में राज्य के नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों के लिए तीन दिवसीय आधारभूत प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसके उद्घाटन अवसर पर मंत्री गोरे संबोधित कर रहे थे।
इस कार्यशाला के पहले चरण में छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशीव, लातूर और पुणे जिलों के कुल 85 जिला परिषद सदस्य शामिल हुए।
मंत्री गोरे ने कहा कि जिला परिषद में प्रभावी कार्य के लिए सदस्यों का प्रशिक्षित होना बेहद आवश्यक है। ग्राम विकास विभाग की ओर से यशदा में नव-निर्वाचित सदस्यों को विभिन्न विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे इस प्रशिक्षण का लाभ उठाकर अपने-अपने क्षेत्रों में समग्र विकास के लिए पहल करें।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में चलाए जा रहे ‘मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत सशक्तिकरण अभियान’ को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और प्रत्येक गांव को समृद्ध बनाने के लिए जिला परिषद सदस्यों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इस अवसर पर जिला परिषद पुणे के अध्यक्ष वीरधवल जगदाले, यशदा के महानिदेशक डॉ. सुहास दिवसे, अतिरिक्त महानिदेशक शेखर गायकवाड़, पुणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन पाटिल, उपमहानिदेशक डॉ. मल्लिनाथ कलशेट्टी तथा सत्र संचालक आनंद पुसावले और शरदचंद्र माली उपस्थित थे।



