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मुख्यमंत्री फडणवीस ने भीमाशंकर में प्रस्तावित ‘हेरिटेज वाड़ी’ परियोजना स्थल का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री फडणवीस ने भीमाशंकर में प्रस्तावित ‘हेरिटेज वाड़ी’ परियोजना स्थल का किया निरीक्षण

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को श्रीक्षेत्र भीमाशंकर क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन विकास के उद्देश्य से प्रस्तावित ‘भीमाशंकर हेरिटेज वाड़ी’ परियोजना स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की रूपरेखा, पुनर्वास प्रक्रिया तथा स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रस्तावित सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में यह गांव स्वयं एक आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा और पर्यटक विशेष रूप से ‘हेरिटेज वाड़ी’ देखने यहां आएंगे।

 

निरीक्षण के दौरान विधायक दिलीप वळसे-पाटिल, बाबाजी काले, पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी, पुलिस अधीक्षक संदीपसिंह गिल, वन विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

मुख्यमंत्री फडणवीस ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि भीमाशंकर के धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए विकास एवं संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने परियोजना के लिए ग्रामीणों द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना करते हुए बताया कि क्षेत्र के लगभग 150 परिवारों को निकटवर्ती स्थान पर पुनर्वासित कर एक सुव्यवस्थित और आधुनिक गांव विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि श्रद्धालु मंदिर दर्शन के साथ-साथ गांव का भी भ्रमण करें, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिले। उन्होंने कहा कि सड़कें, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विद्युत चालित वाहन, सुव्यवस्थित दुकानें और आधुनिक बस स्टैंड जैसी सुविधाओं की बेहतर योजना बनाई गई है, जिससे भविष्य में श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि होगी।

 

जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने बताया कि परियोजना के तहत मूल गांव से लगभग 150 मीटर की दूरी पर 10.5 एकड़ क्षेत्र में ‘हेरिटेज वाड़ी’ विकसित की जाएगी। इसमें पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय किया जाएगा। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने हेतु 40 से अधिक व्यावसायिक इकाइयों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

 

उन्होंने बताया कि यह परियोजना ‘विस्थापन नहीं, पुनर्रचना’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसके तहत ग्रामीणों के सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को अक्षुण्ण रखते हुए निकटवर्ती क्षेत्र में पुनर्वास किया जाएगा। प्रस्तावित हेरिटेज वाड़ी में विरासत प्रवेश द्वार, ग्राम पंचायत कार्यालय, सामुदायिक सभागार, सार्वजनिक सुविधा केंद्र तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा।

 

परियोजना के अंतर्गत ‘लाइवलीहुड अपग्रेडेशन’ मॉडल को अपनाते हुए नई बस्ती को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही मंदिर क्षेत्र के लगभग सभी निवासियों के सुनियोजित पुनर्वास के लिए ‘जीरो फ्रिक्शन मॉडल’ लागू किया जाएगा, जिससे भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

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