
इटावा खंदिया विद्यालय में बड़ा आरोप: अनुपस्थित शिक्षिका का वेतन लगातार जारी, उपस्थिति रजिस्टर में हेरफेर और विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा। जनपद इटावा के प्राथमिक विद्यालय खंदिया में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर और चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में कार्यरत एक महिला शिक्षिका लंबे समय से नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं होती हैं, इसके बावजूद उनका वेतन हर महीने बिना किसी बाधा के सरकारी खाते से जारी किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह मामला केवल अनुपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि उपस्थिति रजिस्टर में भी कथित रूप से उनकी उपस्थिति दर्ज दिखाई जाती है, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विद्यालय व्यवस्था पर सवाल:ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय का संचालन निर्धारित समय के अनुसार नहीं हो रहा है। प्रार्थना का समय सुबह 7:30 बजे निर्धारित है, लेकिन कई बार विद्यालय में गतिविधियाँ 8:30 से 8:40 बजे के बीच शुरू होती हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई और अनुशासन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
बच्चों ने भी बताया कि कुछ शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं आते और कई बार पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में अनुशासन की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
अनुपस्थित शिक्षिका पर गंभीर आरोप:ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप एक महिला शिक्षिका को लेकर है, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे लंबे समय से विद्यालय में नियमित रूप से नहीं आतीं। इसके बावजूद उनका वेतन हर माह बैंक खाते में भेजा जा रहा है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उपस्थिति रजिस्टर में उनकी हाजिरी दर्ज दिखाई जाती है, जबकि वास्तविकता में वे विद्यालय में उपस्थित नहीं रहतीं। इस कथित गड़बड़ी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है।
विभागीय जिम्मेदारी पर सवाल:स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी तक होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच की जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
शिकायतों के बावजूद जांच ठप:ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस मामले की शिकायत की, लेकिन अब तक न तो कोई उच्च स्तरीय जांच हुई और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई आगे बढ़ी है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक विद्यालय का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों की मांग: सख्त कार्रवाई हो,अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी इटावा से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए विद्यालयों में उपस्थिति व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए।
प्रशासन की चुप्पी:फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजरें जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
(यह रिपोर्ट स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों के आरोपों पर आधारित है।)


