
बैरगनिया सीएचसी में 17 फाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का वितरण
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: सीतामढ़ी बिहार
बैरगनिया, सीतामढ़ी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बैरगनिया में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामबाबू रमन की अध्यक्षता में फाइलेरिया मरीजों के लिए एमएमडीपी किट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर 17 फाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का वितरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पिरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम लीड रोहित कुमार के द्वारा एमएमडीपी केयर को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से प्रभावित मरीजों में हाथ, पैर या अन्य अंगों में सूजन (लिम्फेडेमा) की समस्या हो सकती है। एमएमडीपी किट का उद्देश्य मरीजों को नियमित देखभाल के माध्यम से सूजन, संक्रमण और दिव्यांगता के खतरे से बचाना है।
उन्होंने बताया कि एमएमडीपी किट में आमतौर पर साबुन, तौलिया, मॉइस्चराइजर/क्रीम, पानी रखने का बर्तन तथा स्वच्छता संबंधी अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। मरीजों को सलाह दी गई कि वे प्रभावित अंग को प्रतिदिन साबुन और स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोएं, साफ तौलिए से सुखाएं तथा त्वचा को फटने से बचाने के लिए मॉइस्चराइजर का उपयोग करें। साथ ही पैरों या प्रभावित अंगों को ऊंचा रखकर आराम करने, नियमित हल्के व्यायाम करने और किसी प्रकार के घाव या संक्रमण होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई।
भी बी डी एस अरुण राफेल ने कहा कि फाइलेरिया का पूर्ण उपचार भले ही संभव न हो, लेकिन नियमित देखभाल और एमएमडीपी किट के सही उपयोग से सूजन को नियंत्रित रखा जा सकता है तथा बार-बार होने वाले संक्रमण से बचाव किया जा सकता है। इससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है और वे सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो पाते हैं।
इस अवसर पर प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक सर्वानंद पांडेय, भीबीडीएस अरुण राफेल, पिरामल फाउंडेशन से अभिनाश कुमार सिंह एवं दिव्या, आशा फैसिलिटेटर, आशा कार्यकर्ता तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य फाइलेरिया मरीजों को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना, उन्हें रोग प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाना तथा दिव्यांगता की रोकथाम सुनिश्चित करना था। स्वास्थ्य विभाग एवं पिरामल फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में मरीजों को एमएमडीपी किट के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि वे घर पर नियमित रूप से इसकी मदद से अपनी देखभाल कर सकें।


