
हडपसर में रक्त कैंसर के अत्याधुनिक उपचार को नई दिशा, ऑटोलॉगस स्टेम सेल प्रत्यारोपण सफल
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे,। हडपसर स्थित सह्याद्रि सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रक्त कैंसर से पीड़ित 46 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर का सफल ऑटोलॉगस स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया गया। अस्पताल का दावा है कि यह हडपसर इकाई में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अत्याधुनिक उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगा।
हडपसर निवासी 46 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर ऋतिक मेहरा की जनवरी 2026 में नियमित वार्षिक स्वास्थ्य जांच के दौरान रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर असामान्य रूप से कम पाया गया। आगे की जांच में उन्हें आईजीए लैम्ब्डा मल्टीपल मायलोमा नामक रक्त कैंसर का निदान हुआ। यह अस्थि मज्जा की प्लाज्मा कोशिकाओं से संबंधित कैंसर है। विशेष बात यह रही कि उन्हें बीमारी का कोई स्पष्ट लक्षण नहीं था और वे सामान्य रूप से कार्य कर रहे थे।
निदान के बाद मरीज की तीन चरणों में कीमोथेरेपी की गई। इसके बाद चिकित्सकों ने ऑटोलॉगस स्टेम सेल प्रत्यारोपण की सलाह दी, जिसमें मरीज के अपने ही स्टेम सेल का उपयोग कर उच्च मात्रा की कीमोथेरेपी के बाद रक्त कोशिकाओं का पुनर्निर्माण किया जाता है। 15 मई 2026 को उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया और 16 मई को स्टेम सेल प्रत्यारोपण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उपचार के दौरान कोई गंभीर जटिलता नहीं आई और 2 जून 2026 को उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल के हिमैटोलॉजिस्ट एवं हिमैटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रकांत लहाणे ने बताया कि मल्टीपल मायलोमा प्रारंभिक अवस्था में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित हो सकता है। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच से बीमारी का समय रहते पता चलना संभव होता है। उन्होंने कहा कि पात्र मरीजों के लिए ऑटोलॉगस स्टेम सेल प्रत्यारोपण एक प्रभावी उपचार विकल्प है, जिससे दीर्घकालिक बेहतर परिणाम और गहरी रोगमुक्ति (रिमिशन) प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, हडपसर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने से हडपसर, मगरपट्टा, खराड़ी, वानवड़ी, हांडेवाड़ी, सासवड, बारामती, अकलूज, सोलापुर तथा आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत रक्त कैंसर उपचार की सुविधा अपने क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में रक्त कैंसर और अन्य रक्त विकारों के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्टेम सेल प्रत्यारोपण की सुविधाओं का विस्तार और जनजागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।



