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उच्च शिक्षा मंत्री ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का किया अनावरण 

उच्च शिक्षा मंत्री ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का किया अनावरण 

देश को विश्वगुरू बनाने का सपना नई शिक्षा नीति साकार करेगी – उच्च शिक्षा मंत्री

स्वामी विवेकानंद के विचार भारतीय ज्ञान परंपरा के ध्वजवाहक हैं – श्री परमार 

 

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा . उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा तथा आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा का अनावरण किया। उच्च शिक्षा मंत्री ने पौधे रोपित करके पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित विचार संगोष्ठी में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार और दर्शन आज के युवाओं के लिए भी प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने सनातन, ज्ञान और धर्म की ध्वजा को पश्चिम के देशों में जाकर सफलतापूर्वक लहराया। स्वामी विवेकानंद के विचार भारतीय ज्ञान पंरपरा के ध्वजवाहक हैं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक देश को विश्वगुरू बनाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री जी की पहल और प्रेरणा से सनातन परंपरा, भारतीय दर्शन और परंपरागत कौशल को समाहित करते हुए नई शिक्षा नीति का निर्माण किया गया है। मध्यप्रदेश में इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी के देश को विश्वगुरू बनाने का सपना नई शिक्षा नीति साकार करेगी।

 

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत में हजारों साल से ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य और धर्म का अपरिमित उत्कर्ष था। अंग्रेजों की शिक्षा प्रणाली ने हमारी सनातन हमारी शिक्षा पद्धति को नष्ट कर दिया। भारत पर प्राचीन काल से ही लगातार आक्रमण हुए। ये सभी आक्रमण देश के वैभव, संपन्नता और प्रचुर सम्पत्ति को लूटने के लिए हुए। देश पर आक्रमण करने वाले सिकंदर जैसे आक्रांताओं को महान कहने का इतिहास पढ़ाया गया, लेकिन देश के प्राचीन गौरव को भुला दिया गया। हमारी वसुधैव कुटुम्बकम की परंपरा को स्वामी विवेकानंद ने विश्वभर में स्थापित किया। कार्यक्रम में विचारक श्री चेतस सुखाड़िया ने कहा कि चार जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद जी परमात्मा के पास चले गए, लेकिन उनके विचार आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित कर रहे हैं। जब देश राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से पराधीन था तब स्वामी जी ने अमेरिका में जाकर भारतीय ज्ञान और दर्शन का ध्वज लहराया। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर लाखों युवाओं ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। स्वामी विवेकानंद के विचार ऐसे सूर्य हैं जो कभी अस्त नहीं होते हैं। स्वामी जी ने धर्म और ज्ञान को सामाजिक परिवर्तन और देश को जागृत करने का साधन बनाया।

 

समारोह में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रघुराज तिवारी ने कहा कि हिन्दुत्व जीवन की पद्धति और विचारधारा है। स्वामी विवेकानंद के विचार युवा अपने मन में उतारकर सभी संशय दूर कर सकते हैं। नैतिक आधार पर ही शिक्षा कारगर होगी। डॉ. अजय तिवारी ने भी कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर राजेन्द्र कुड़रिया ने कहा कि विश्वविद्यालय में विवेकानंद विचार पीठ तथा ध्यान केन्द्र की स्थापना की जाएगी। विश्वविद्यालय में इसी वर्ष से गुजराती और सिंधी का कोर्स आरंभ हो रहा है। उन्होंने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विधायक मनगवां श्री नरेन्द्र प्रजापति, पूर्व महापौर श्री वीरेन्द्र गुप्ता, कुलसचिव सुश्री नीरजा नामदेव तथा प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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