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‘ज्ञान-कर्म-भक्तियोग’ महाप्रवेश द्वार भक्ति और ज्ञान का जीवंत प्रतीक : ह.भ.प. बापूसाहेब मोरे

‘ज्ञान-कर्म-भक्तियोग’ महाप्रवेश द्वार भक्ति और ज्ञान का जीवंत प्रतीक : ह.भ.प. बापूसाहेब मोरे

महाप्रवेश द्वार के निर्माण के इतिहास पर आधारित विशेष पुस्तिका का लोकार्पण

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र 

देहू, । देहू स्थित ‘ज्ञान-कर्म-भक्तियोग’ महाप्रवेश द्वार केवल एक भव्य स्थापत्य नहीं, बल्कि भक्ति और ज्ञान का जीवंत प्रतीक है। यह विचार संत श्री तुकाराम महाराज के वंशज एवं देहू देवस्थान के पूर्व अध्यक्ष ह.भ.प. बापूसाहेब मोरे ने व्यक्त किए।

जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज की पालखी प्रस्थान यात्रा के अवसर पर विश्वशांति केंद्र आळंदी, माईर्स एमआईटी पुणे तथा श्रीक्षेत्र आळंदी-देहू परिसर विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘तत्त्वज्ञ जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज ज्ञान-कर्म-भक्तियोग महाप्रवेश द्वार’ के रजत जयंती वर्ष (25वें वर्ष) के उपलक्ष्य में समिति के कार्यों तथा महाप्रवेश द्वार के निर्माण के इतिहास पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का लोकार्पण देहू में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ह.भ.प. बापूसाहेब मोरे उपस्थित थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वशांति दिंडी (आळंदी से श्रीक्षेत्र पंढरपुर) की संस्थापक अध्यक्षा ह.भ.प. उषा विश्वनाथ कराड ने की। वहीं श्री क्षेत्र भंडारा डोंगर ट्रस्ट के अध्यक्ष बालासाहेब काशीद प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में ह.भ.प. बापूसाहेब मोरे ने कहा कि लगभग 25 वर्ष पूर्व जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज के नाम के अनुरूप इस भव्य महाप्रवेश द्वार का निर्माण किया गया था। इसके निर्माण से देहू तीर्थक्षेत्र की गरिमा और पहचान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि आज 25 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा का इतिहास विशेष पुस्तिका के माध्यम से समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तिका आने वाली पीढ़ियों को संत परंपरा, आध्यात्मिक विचारों तथा तीर्थक्षेत्र के विकास से प्रेरणा प्रदान करेगी।

श्री क्षेत्र भंडारा डोंगर ट्रस्ट के अध्यक्ष बालासाहेब काशीद ने कहा कि श्रीक्षेत्र आळंदी-देहू परिसर विकास समिति ने पिछले अनेक वर्षों में देहू तीर्थक्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस पुस्तिका के माध्यम से समिति के कार्यों और विकास यात्रा का इतिहास सजीव रूप में सामने आया है।

समिति की समन्वयक तथा माईर्स एमआईटी संस्थान की न्यासी एवं महासचिव प्रो. स्वाती कराड-चाटे ने कहा कि विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड के मार्गदर्शन में निर्मित इस भव्य महाप्रवेश द्वार ने आज 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि इस पुस्तिका का उद्देश्य महाप्रवेश द्वार के निर्माण से जुड़े संघर्ष, इतिहास और समिति के योगदान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड द्वारा संत सेवा और विश्वशांति के लिए किए जा रहे कार्यों को आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर देहू की नगराध्यक्ष पूजा दिवटे, उपनगराध्यक्ष प्रियांका मोरे, ह.भ.प. नितीन महाराज मोरे, देहू देवस्थान के पूर्व न्यासी बालासाहेब मोरे, पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य बालासाहेब काळोखे, नंदकुमार काळे, विठ्ठलराव काळोखे, पुणे जिला परिषद के पूर्व सदस्य माऊली काळोखे, पूर्व सरपंच अशोक मोरे, ह.भ.प. डॉ. सुदाम महाराज पानेगांवकर, प्रो. विकास कंद, देहू नगर परिषद के वर्तमान एवं पूर्व सदस्य, ग्रामवासी तथा बड़ी संख्या में वारकरी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का प्रस्तावना भाषण बालासाहेब काळोखे ने दिया। संचालन संदीप वसंत शिंदे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन उमेश टीजगे ने किया

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