
अत्याचार से पीड़ित व्यक्ति को राहत राशि देने में अनावश्यक विलंब न हो – कमिश्नर शीलेंद्र सिंह
जाति प्रमाण पत्र के अभाव में जांच एवं विवेचना में देरी न हो
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:रीवा मध्य प्रदेश
रीवा . अत्याचार से पीड़ित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को शासन के निर्देश अनुसार राहत राशि देने में किसी भी प्रकार का विलंब न हो। यदि राशि का आवंटन नहीं है तो प्राथमिकता से शासन स्तर से राशि आवंटित कराकर पीड़ित व्यक्तियों को राहत राशि देना सुनिश्चित किया जाए। उक्त निर्देश रीवा संभाग कमिश्नर श्री शीलेंद्र सिंह ने अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण नियम 1995 के अंतर्गत गठित संभाग स्तरीय सतर्कता सलाहकार एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में दिए। बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत रीवा कलेक्टर श्री नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, सतना कलेक्टर श्री सतीश कुमार एस, मैहर कलेक्टर श्रीमती विदिशा मुखर्जी मऊगंज कलेक्टर श्री संजय कुमार जैन, सीधी कलेक्टर श्री विकास मिश्रा, सिंगरौली कलेक्टर श्री गौरव बैनल, रीवा के पुलिस अधीक्षक श्री गुरकरन सिंह एवं संभाग के अन्य जिलों के पुलिस अधीक्षकगण तथा सभी जिला अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे।
कमिश्नर ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे सभी थाना प्रभारियों के लिए निर्देश जारी करें कि एसडीएम से जाति प्रमाण पत्र सत्यापित कराकर जाति प्रमाण पत्र के अभाव में किसी भी प्रकार की जांच या विवेचना लंबित न रहे और न ही विवेचना में किसी भी प्रकार की देरी हो। कमिश्नर ने अभियोजन स्वीकृति एवं न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति की समीक्षा की, उन्होंने अपराधिक व्यक्तियों को मिलने वाली कम सजा पर असंतोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिए की सभी प्रकरणों में बारीकी से जांच पड़ताल कर दोषी व्यक्तियों के विरुध ठोस प्रकरण बनाए जाएं। कमिश्नर ने सभी प्रकरणों में तामीली की गति बढ़ाने के निर्देश दिए और कहां की तामीली शत प्रतिशत की जाए। साथ ही न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने में शीघ्रता की जाए। कमिश्नर ने निर्देश दिए की सभी प्रकरण गुणवत्ता पूर्ण बनाए जाएं, समय पर पीड़ित व्यक्ति एवं गवाह को राहत राशि मिल जाए। उन्होंने सभी जिला अभियोजन अधिकारियों से कहा कि वह अतिरिक्त मेहनत करके दोषी व्यक्तियों को सजा दिलाने एवं पीड़ित व्यक्तियों को राहत देना सुनिश्चित करें, कमिश्नर ने कहा कि सभी जिला अभियोजन अधिकारी अपने काम में कसावट लाएं।
कमिश्नर ने निर्देश दिए कि अत्याचार से पीड़ित व्यक्तियों के लिए शासन के निर्देशानुसार अन्य जिलों को प्रेषित प्रकरण के भुगतान आदेश की प्रति अन्य जिलों से प्राप्त होती है भुगतान की जानकारी नियमित रूप से प्रेषित की जाए। कमिश्नर ने अत्याचार से पीड़ित एवं आश्रित व्यक्तियों को दिए जाने वाले यात्रा भत्ता, भरण पोषण, आहार एवं पीड़ितों को रोजगार प्रदान करने आदि के संबंध में जानकारी ली एवं आवश्यक निर्देश दिए।
कमिश्नर ने कहा कि जिन थाना क्षेत्रों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के विरुद्ध अत्याचार से संबंधित अधिक संख्या में प्रकरण दर्ज होते हैं उन थाना क्षेत्र के लोगों में आपस में सद्भावना उत्पन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के सद्भावना के कार्यक्रम आयोजन किए जाएं। साथ ही प्रकरणों में सजा का प्रतिशत बढ़ाने हेतु एवं पीड़ितों तथा गवाहों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए जिला अभियोजन अधिकारी एवं पुलिस विभाग के अधिकारी परस्पर समन्वय स्थापित करें।
कमिश्नर ने निर्देश दिए की रीवा संभाग के सभी जिलों में जिला स्तरीय एवं उपखंड स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक नियमित अंतराल पर आयोजित की जाए। कमिश्नर ने अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 अंतर्गत जिलेवार राहत राशि भुगतान की स्थिति की समीक्षा की तथा 1 जनवरी 2026 की स्थिति में प्रकरणों में चालान प्रस्तुति की स्थिति तथा विवेचना में लंबित प्रकरणो की स्थिति की तथा अत्याचार निवारण अधिनियम अंतर्गत पुलिस थानों में दर्ज एवं पंजीकृत प्रकरणों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और निर्देश दिए कि अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत विवेचना में 60 दिन से अधिक अवधि के कोई भी प्रकरण लंबित न रखे जाएं सभी प्रकरणो में विवेचना कर चालान प्रस्तुत कर तामिली कराई जाए।


